अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3% रहने का अनुमान लगाया है। AI से मदद मिलने की उम्मीद है, लेकिन मध्य-पूर्व के तनाव और ऊंचे ब्याज दरों का असर दिख सकता है। वहीं, अमेरिका का रियल एस्टेट सेक्टर भी दबाव में है।
IMF का बड़ा ग्लोबल इकोनॉमी आउटलुक
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जुलाई 2026 तक वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर नजर बनाए हुए है। फंड ने इस साल के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3% पर बरकरार रखा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही तरक्की आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक सपोर्ट का काम कर रही है। हालांकि, IMF ने आगाह किया है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और दुनिया भर में ऊंचे ब्याज दरों के कारण यह ग्रोथ अनुमान नीचे जाने का जोखिम ज्यादा है।
अमेरिकी रियल एस्टेट और ट्रेड पर असर
अमेरिका में रियल एस्टेट सेक्टर लगातार दबाव झेल रहा है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियलटर्स के आंकड़ों के अनुसार, जून में पिछले घरों की बिक्री 2.4% घटकर 4.09 मिलियन के सालाना रेट पर आ गई। लगातार ऊंचे बने हुए मॉर्गेज रेट्स (Mortgage Rates) इस कमजोरी की मुख्य वजह हैं। इसके अलावा, मई में अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) भी एक साल से ज्यादा समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो आयात बढ़ने और निर्यात घटने का नतीजा है।
यूरोप और एशिया की मिली-जुली तस्वीर
यूरोप में स्थिति थोड़ी बेहतर दिख रही है। फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने अपनी ग्रोथ की उम्मीदें बढ़ाई हैं, जो जून में आर्थिक गतिविधियों में आए सुधार को दर्शाती हैं। जर्मनी के औद्योगिक सेक्टर में भी रिकवरी देखने को मिली है, खासकर ट्रांसपोर्ट और सैन्य उपकरण सेक्टर में फैक्ट्री ऑर्डर बढ़े हैं।
दूसरी ओर, एशिया में महंगाई और क्रेडिट की स्थिति मिली-जुली है। जापान में, 2023 की शुरुआत के बाद से फैक्ट्री प्राइस में सबसे तेज उछाल आया है, जिससे बैंक ऑफ जापान (BOJ) ब्याज दरों में और बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। इसके बावजूद, जापान में बैंक की ओर से दिया जाने वाला लोन (Bank Lending) महामारी के बाद सबसे तेज दर से बढ़ा है। वहीं, चीन में जून के आंकड़े बताते हैं कि उपभोक्ता और कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) उम्मीद से कम रहे, जो घरेलू मांग में कमजोरी का संकेत है।
निवेशकों के लिए बड़ी बातें
निवेशकों को सेंट्रल बैंकों की ब्याज दरों की पॉलिसी पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ऊंचे रेट्स का असर मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) और कंज्यूमर डिमांड (Consumer Demand) पर पड़ सकता है। आने वाले समय में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के इन्फ्लेशन डेटा और भू-राजनीतिक स्थिरता में कोई भी बदलाव ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) और कमोडिटी कीमतों (Commodity Prices) को प्रभावित कर सकता है।
