वैश्विक बाजारों में फिलहाल थोड़ी राहत दिख रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों से बड़ी भू-राजनीतिक आशंकाएं कम हुई हैं। निवेशक अब बढ़ती वैश्विक तनाव से जुड़े सबसे बुरे हालात को फिलहाल नजरअंदाज कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर
लेकिन, इस आशावाद के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। ऑर्टन का जोर है कि इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट से तेल का प्रवाह (flow) इतनी जल्दी सामान्य नहीं हो पाएगा। ऊंचे इंश्योरेंस कॉस्ट, लॉजिस्टिकल दिक्कतें और संभावित ईरानी प्रतिबंधों जैसे फैक्टर लंबे समय तक रुकावटें पैदा कर सकते हैं, जिससे एनर्जी प्राइसेज (Energy Prices) ऊंचे बने रहेंगे। यह सीधे टकराव के बारे में कम, बल्कि उभरती हुई जटिल ऑपरेशनल स्थिति के बारे में अधिक है।
एनर्जी प्राइसेज और महंगाई का डर
लगातार ऊंची बनी हुई एनर्जी प्राइसेज (Energy Prices) दुनिया भर में महंगाई (inflation) का एक बड़ा कारण हैं। ऑर्टन का कहना है कि महंगाई का यह दबाव सेंट्रल बैंक्स, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) को मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) को नरम करने से रोक सकता है। हालांकि हालिया फेड (Fed) के बयानों से बाजारों में कुछ स्थिरता आई है, लेकिन महंगाई का अंतर्निहित जोखिम (underlying risk) काफी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
निवेश की रणनीति: एनर्जी स्टॉक्स पर दांव
निवेश की बात करें तो, ऑर्टन व्यापक बाजार (broader market) में निवेश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। हालांकि, वह एनर्जी स्टॉक्स (energy stocks) को एक पसंदीदा सेक्टर मानते हैं, क्योंकि कमोडिटी प्राइसेज (commodity prices) में मजबूती से इन कंपनियों के मुनाफे (profits) में इजाफा होने की उम्मीद है। रणनीतिकार अगले दो से तीन हफ्तों को बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, जो भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रमुख सप्लाई रूट्स की ऑपरेशनल स्थिति पर निर्भर करेगा।