एशियाई बाजारों पर भू-राजनीतिक झटके, वॉल स्ट्रीट AI की मजबूती पर दांव लगा रहा

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
एशियाई बाजारों पर भू-राजनीतिक झटके, वॉल स्ट्रीट AI की मजबूती पर दांव लगा रहा
Overview

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेजी के कारण मंगलवार को एशियाई शेयर बाजार (Asian markets) धड़ाम हो गए। निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों (risk assets) से दूरी बना ली। भारत के GIFT Nifty ने भी घरेलू शेयर बाजार के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत दिया। वहीं, वॉल स्ट्रीट (Wall Street) पर हालांकि उतार-चढ़ाव भरा सत्र रहा, लेकिन AI (Artificial Intelligence) की उम्मीदों से प्रेरित होकर यह मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

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पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव (military actions) ने ग्लोबल बाजारों पर गहरा असर डाला है। मंगलवार को एशियाई इक्विटी (Asian equities) में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। दक्षिण कोरिया का KOSPI 5.10% लुढ़क गया और जापान का Nikkei 225 2.65% नीचे आ गया। यू.एस. क्रूड (U.S. crude) 6% महंगा हुआ, वहीं ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 6.68% चढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग पर खतरे की आशंकाओं ने सप्लाई में कमी और महंगाई (inflation) बढ़ने की चिंताएं बढ़ा दीं, खासकर तेल आयात करने वाले देशों के लिए। भारत के GIFT Nifty फ्यूचर्स ने घरेलू बाजारों के लिए बड़ी गिरावट के संकेत दिए।

इसके विपरीत, वॉल स्ट्रीट (Wall Street) ने कुछ हद तक मजबूती दिखाई। शुरुआती गिरावट के बाद, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) 0.15% गिरा, एस एंड पी 500 (S&P 500) 0.04% बढ़ा और नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) 0.36% चढ़ गया। इस प्रदर्शन में एनर्जी, टेक्नोलॉजी और डिफेंस शेयरों का अहम योगदान रहा। खासकर, AI (Artificial Intelligence) पर केंद्रित शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, जिन्होंने माना कि AI से उत्पादकता (productivity) बढ़ेगी और महंगाई व भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का सामना करने में मदद मिलेगी।

भारत के लिए, कच्चे तेल पर निर्भरता एक बड़ी चिंता है। $1 प्रति बैरल तेल की बढ़ोतरी से भारत के सालाना इंपोर्ट बिल में $1.8–2 बिलियन का इजाफा हो सकता है। इससे चालू खाते का घाटा (current account deficit) बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है। महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के चलते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। भारत का सेंसेक्स (Sensex) P/E रेशियो लगभग 22.320 पर है, जो दर्शाता है कि भारतीय बाजार की वैल्यूएशन (valuation) काफी अधिक है और यह भू-राजनीतिक झटकों व महंगाई के दबाव के प्रति संवेदनशील हो सकता है।

वेस्ट एशिया में संघर्ष ग्लोबल कमोडिटी आयातकों के लिए बड़े स्ट्रक्चरल जोखिम (structural risks) पैदा करता है। भारत, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल पर बहुत निर्भर है, एक महत्वपूर्ण जोखिम में है। इस मार्ग पर किसी भी लंबे समय तक चलने वाले व्यवधान से न केवल घरेलू ईंधन की लागत बढ़ेगी, बल्कि महंगाई और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ेगा। भारत VIX (India VIX) का 17 के आसपास (+25.97%) स्तर निवेशकों की घबराहट को दिखाता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली जारी रह सकती है, जिससे घरेलू बाजारों पर और दबाव पड़ेगा। एविएशन और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर भी असर पड़ सकता है।

आगे का रास्ता इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया में तनाव कैसे कम होता है। अगर तनाव घटता है, तो बाजारों को राहत मिल सकती है और तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। हालांकि, अगर स्थिति बिगड़ती है तो महंगाई का दबाव और कंपनियों के मुनाफे (corporate earnings) पर असर बढ़ सकता है। कुछ विश्लेषकों (analysts) का मानना है कि सबसे खराब स्थिति में तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल को भी पार कर सकती हैं, जबकि JP Morgan जैसे संस्थान $50-60 की रेंज में कीमतों की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें भू-राजनीतिक कारणों से छोटे उछाल आ सकते हैं। निवेशक AI से उत्पादकता लाभ पर नजर बनाए हुए हैं, जो दर्शाता है कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद, लंबी अवधि के तकनीकी रुझान (technological trends) बाजार के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.