भू-राजनीतिक अनिश्चितता से भारतीय अर्थव्यवस्था पर खतरा
NITI Aayog की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत के व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इन तनावों से देश का व्यापार घाटा (trade deficit) और गहरा सकता है और भारतीय रुपये (Indian Rupee) का अवमूल्यन भी हो सकता है। इस अस्थिरता के कारण भारत-GCC फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर प्रगति में भी देरी की खबरें हैं, जो व्यापार को विविध बनाने के प्रयासों को बाधित कर रही है। यह सब तब हो रहा है जब भारत की जीडीपी (GDP) ने 7.8% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है, जो बाहरी झटकों के बावजूद अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाता है।
रत्न और आभूषण निर्यात पर सीधा असर
पश्चिम एशिया के संघर्ष का सीधा असर भारत के व्यापार पर पड़ा है, खासकर रत्न और आभूषण क्षेत्र पर, जो देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अप्रैल-दिसंबर के दौरान, इस सेक्टर का निर्यात डॉलर के मुकाबले 3.32% घटकर $27.72 बिलियन रह गया। इस गिरावट का मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) जैसे प्रमुख बाजार से मांग में आई भारी कमी है, जो 44.92% तक गिर गई। इस सुस्ती के कारण निर्यातकों को अपनी बाजार रणनीतियों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है और नए गंतव्यों की तलाश करनी पड़ रही है।
UAE बना नया फोकस, GJEPC की रणनीति
भारत का रत्न और आभूषण क्षेत्र, जो देश की जीडीपी का लगभग 7% और मर्चेंडाइज निर्यात का 10-12% हिस्सा है, एक जटिल वैश्विक परिदृश्य से गुजर रहा है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, निर्यात में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब निर्यात का प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है, जहां पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए 10.52% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह भारत-UAE एफटीए (India-UAE FTA) के कारण संभव हुआ है। यह विविधीकरण (diversification) महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सेक्टर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बदलती अमेरिकी व्यापार नीतियों का सामना कर रहा है। NITI Aayog ने डिजाइन-आधारित विनिर्माण (design-led manufacturing) और उच्च-मूल्य वाले निर्यात पर जोर देने की सिफारिश की है।
आर्थिक जोखिम और रुपये पर दबाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि भारत का लगभग 90% कच्चा तेल (crude oil) होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण मार्गों से होकर गुजरता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला, तो आयात लागत बढ़ने और विदेशी निवेश (foreign investment) में कमी आने से भारत का व्यापार घाटा बढ़कर जीडीपी का लगभग 2% तक पहुंच सकता है। वित्तीय हालात (financial conditions) काफी तंग हो गए हैं, और मार्च 2026 के बाद से पूंजी (capital) देश से बाहर निकल रही है और रुपया कमजोर हो रहा है। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि लड़ाई जारी रहती है तो डॉलर के मुकाबले रुपया 97-98 तक जा सकता है।
भविष्य की राह: विविधीकरण और नवाचार
विविधीकरण के प्रयासों के बावजूद, रत्न और आभूषण क्षेत्र को संरचनात्मक मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी मांग में भारी गिरावट, लैब-ग्रोन डायमंड (lab-grown diamonds) की गिरती कीमतों और सोने की ऊंची कीमतों के कारण सादे सोने के आभूषणों (plain gold jewellery) की बिक्री पर असर पड़ा है। हालांकि चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों (silver and platinum jewellery) में वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन कुल निर्यात में गिरावट कुछ प्रमुख उत्पादों और बाजारों पर निर्भरता को दर्शाती है। भारत-GCC एफटीए पर बातचीत सकारात्मक है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण इसमें देरी हो सकती है। इसके अतिरिक्त, लगातार मुद्रास्फीति (inflation) के जोखिम और वैश्विक फंडिंग (global funding) के तंग होने से उपभोक्ता खर्च (consumer spending) और निवेश पर असर पड़ सकता है, जिससे उच्च-मूल्य वाले आभूषणों जैसी विवेकाधीन खरीद (discretionary purchases) कम हो सकती है।
NITI Aayog ने एफटीए (FTAs) और व्यावसायिक सुधारों के माध्यम से गहरे एकीकरण की सिफारिश की है ताकि भारत के व्यापार को और मजबूत बनाया जा सके। विविध बाजारों, उच्च-मूल्य वाले उत्पादों और बेहतर वित्तीय पहुंच की ओर रत्न और आभूषण क्षेत्र का यह बदलाव वैश्विक अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऊर्जा की कीमतों और व्यापार को प्रभावित करने वाले चल रहे संघर्षों के कारण तत्काल आर्थिक जोखिम बने हुए हैं। हालांकि, भारत की मूलभूत आर्थिक ताकतें और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने से इन चुनौतियों को दूर करने और विकास बनाए रखने में मदद मिलेगी। IMF का अनुमान है कि भारत 2025 तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो वर्तमान दबावों के बावजूद एक सकारात्मक दीर्घकालिक दृष्टिकोण का संकेत देता है।
