Yardeni का 'Roaring 2020s' दांव पर? भारत के तेल आयात पर भू-राजनीतिक खतरा

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Yardeni का 'Roaring 2020s' दांव पर? भारत के तेल आयात पर भू-राजनीतिक खतरा
Overview

अर्थशास्त्री एड यार्डनी (Ed Yardeni) आने वाले समय में भू-राजनीतिक तनावों में कमी और 'रोरिंग 20s' यानी 2020 के दशक में शानदार आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं। उनका मानना है कि कमोडिटी (Commodity) में मुनाफावसूली (Profit-taking) का समय आ गया है और भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को इससे फायदा होगा। हालांकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और भारत के महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर मंडरा रहा खतरा, उनके इस आशावादी नज़रिया पर पानी फेर सकता है।

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यार्डनी का 'रोरिंग 20s' का सपना और भू-राजनीतिक तूफान

जाने-माने अर्थशास्त्री एड यार्डनी (Ed Yardeni) का मानना है कि दुनिया जल्द ही भू-राजनीतिक (Geopolitical) उठापटक से उबर जाएगी। उनका अनुमान है कि कच्चे तेल (Crude Oil) और सोने (Gold) जैसी कमोडिटी में मुनाफावसूली का दौर शुरू होगा। यार्डनी के मुताबिक, अभी कमोडिटी की कीमतों में आई तेजी अस्थायी है और निवेशकों को लगातार झटकों से बचाव के लिए लंबी-चौड़ी हेजिंग (Hedging) की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। यार्डनी का व्यापक अनुमान है कि यह दशक 'रोरिंग 20s' जैसा होगा, जिसमें तकनीकी प्रगति (Technological Advancements) के दम पर जोरदार आर्थिक वृद्धि देखने को मिलेगी। उनका मानना है कि बाजार में आने वाली छोटी-मोटी गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी के बेहतरीन मौके पेश करेगी। फिलहाल, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें लगभग $76.30 प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) $69.94 प्रति बैरल के आसपास हैं, जबकि सोना $5,300-$5,400 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

भारत के लिए उम्मीदें, पर शर्तें लागू!

ऊर्जा की कीमतों में नरमी आने से भारत जैसे प्रमुख तेल आयात करने वाले देशों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे भारत में महंगाई कम होगी, व्यापार संतुलन (Trade Balance) सुधरेगा और लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। ऐतिहासिक रूप से, कच्चे तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की गिरावट से भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 0.5% की कमी आ सकती है।

हालांकि, यह राहत इस बात पर निर्भर करती है कि तेल की कीमतें स्थिर रहें या गिरें। भारत का जीडीपी के मुकाबले तेल आयात पर निर्भरता भले ही 8.5% से घटकर 4.8% हो गई हो और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewables) में निवेश बढ़ा हो, लेकिन देश अभी भी तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 50% आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से करता है, जो मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के कारण सीधे तौर पर खतरे में है।

आशावादी नज़रिया पर खतरे की घंटी

यार्डनी के भू-राजनीतिक स्थिरता के अनुमानों को मिडिल ईस्ट की मौजूदा अस्थिरता से बड़ा झटका लग सकता है। ईरान पर बढ़ते हमले और तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग बाधित होती है, तो ये $80 प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति भारत के आर्थिक फायदों को गंभीर रूप से कमजोर कर देगी। तेल की कीमतों में लगातार 25% की वृद्धि से भारत के आयात बिल में $15 अरब का इजाफा हो सकता है, चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.3% बढ़ सकता है और वास्तविक जीडीपी वृद्धि 0.2% कम हो सकती है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से होने वाला प्रेषित धन प्रवाह (Remittance Flows), जिसका सालाना अनुमान $40-50 अरब है, भी खतरे में पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर, महंगाई (Inflation) के 2026 में औसतन 2.8% रहने का अनुमान है, हालांकि क्षेत्रीय भिन्नताएं बनी रहेंगी, जिसमें अमेरिका में यूरोप की तुलना में अधिक महंगाई की उम्मीद है। विश्व बैंक (World Bank) 2026 में वैश्विक वृद्धि में कमजोरी के कारण कमोडिटी की कीमतों में 7% की गिरावट का अनुमान लगाता है, जो यार्डनी के विशिष्ट कमोडिटी के लिए आशावाद के विपरीत है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) कीमतों में अंतर की भविष्यवाणी करता है, जिसमें कीमती धातुएं (Precious Metals) और आधार धातुएं (Base Metals) बेहतर प्रदर्शन करेंगी, जबकि कृषि (Agriculture) दबाव का सामना करेगी।

भारत के शेयर बाजार (Equity Markets) में विकास की संभावना तो है, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन (Elevated Valuations) एक चुनौती बने हुए हैं। सेंसेक्स (Sensex) अपने 15-वर्षीय औसत से काफी ऊपर, 24.4x के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो (Forward P/E ratio) पर कारोबार कर रहा है, जो मल्टीपल विस्तार (Multiple Expansion) के लिए सीमित गुंजाइश और कमाई के अनुमानों (Earnings Projections) के कमजोर पड़ने पर बढ़े हुए जोखिम का संकेत देता है। रुपये में कमजोरी भी विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) के लिए एक लगातार चुनौती पेश कर रही है।

नज़रिया: अनिश्चितता से प्रभावित वृद्धि

इन जोखिमों के बावजूद, यार्डनी अपने 'रोरिंग 20s' के अनुमान पर कायम हैं। उनका अनुमान है कि 2026 तक एसएंडपी 500 (S&P 500) की कमाई $310 तक पहुंच जाएगी, और इंडेक्स के लिए लक्ष्य 7,500 है। उनकी फर्म का अनुमान है कि 2026 एक ऐसा दुर्लभ वर्ष हो सकता है जब विश्लेषकों (Analysts) के एसएंडपी 500 कंपनियों के लिए कमाई के अनुमान (Earnings Estimates) पूरे साल में घटेंगे नहीं, बल्कि स्थिर या सुधरेंगे। भारत के लिए, विश्लेषक सकारात्मक बने हुए हैं। एचएसबीसी (HSBC) का मानना है कि निफ्टी (Nifty) का मूल्यांकन ऐतिहासिक औसत (Historical Averages) के अनुरूप है और 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors) की वापसी की उम्मीद है, जिसे फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) में अपेक्षित कमाई वृद्धि (Expected Earnings Growth) का समर्थन मिलेगा। कोटक म्यूचुअल फंड (Kotak Mutual Fund) भारत के लिए मध्यम रिटर्न (Moderate Returns) की उम्मीद करता है, जो अल्पकालिक लाभ के बजाय लंबी अवधि के बुनियादी तत्वों (Long-term Fundamentals) पर जोर देता है।

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