Gen Z की कमाई: क्रेडिट कार्ड से पहले BNPL और पर्सनल लोन का रास्ता!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gen Z की कमाई: क्रेडिट कार्ड से पहले BNPL और पर्सनल लोन का रास्ता!

ट्रांसयूनियन सिबिल के डेटा से पता चला है कि भारत में 70% Gen Z ग्राहक अपना पहला क्रेडिट कार्ड मिलने से पहले ही BNPL या पर्सनल लोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बड़े बदलाव का संकेत है, जो मिलेनियल्स से काफी अलग है।

Gen Z का बदला मिजाज: क्रेडिट की दुनिया में एंट्री

युवा पीढ़ी, यानी Gen Z, अब क्रेडिट का इस्तेमाल करने के अपने तरीके से सबको चौंका रही है। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर 10 में से 7 Gen Z ग्राहक अपना पहला क्रेडिट कार्ड लेने से पहले ही 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) सेवाओं, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन या छोटे पर्सनल लोन जैसे क्रेडिट प्रोडक्ट्स का सहारा ले रहे हैं। यह ट्रेंड मिलेनियल्स (Millennials) पीढ़ी से बिल्कुल अलग है, जो पहले क्रेडिट हिस्ट्री बनाने के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते थे।

पुराने तरीके की जगह नया चलन

रिपोर्ट बताती है कि 2018 में 24 से 30 साल के आधे से ज़्यादा मिलेनियल्स ने बिना किसी क्रेडिट हिस्ट्री के अपना पहला क्रेडिट कार्ड लिया था। लेकिन 2024 तक, Gen Z में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 30% रह गया है। इसका मतलब है कि अब युवा क्रेडिट कार्ड को उधार लेने का पहला जरिया नहीं मानते, बल्कि वे पहले से ही कई तरह के लोन और क्रेडिट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक-तिहाई Gen Z ग्राहक जब पहला क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते हैं, तब उनके पास पहले से ही दो या ज़्यादा एक्टिव क्रेडिट प्रोडक्ट्स होते हैं। इतना ही नहीं, ये युवा क्रेडिट के मामले में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 69% Gen Z ग्राहक अपना पहला कार्ड मिलने के 12 महीने के अंदर ही कोई दूसरा क्रेडिट प्रोडक्ट ले लेते हैं, जो मिलेनियल्स से काफी ज़्यादा है।

डिजिटल आसानी और खर्च करने का नया तरीका

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण है डिजिटल-फर्स्ट लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स और BNPL ऑप्शंस का तेजी से बढ़ना। ये सेवाएं सीधे शॉपिंग ऐप्स में इंटीग्रेट होती हैं, जिससे पेमेंट्स को किश्तों में बांटना या तुरंत क्रेडिट लेना बेहद आसान हो जाता है। Gen Z के लिए, क्रेडिट अब सिर्फ एक 'फाइनेंशियल कमिटमेंट' नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने और तुरंत खरीदारी करने का एक आसान ज़रिया बन गया है। डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया का प्रभाव भी इस पीढ़ी को आसानी से कर्ज लेने के लिए प्रेरित कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए, यह बदलाव नए कस्टमर्स के प्रोफाइल को पूरी तरह बदल देता है। अब लेंडर्स 'ब्लैंक स्लेट' (blank slate) का मूल्यांकन नहीं कर रहे, बल्कि ऐसे लोगों को लोन दे रहे हैं जिनके ऊपर पहले से ही आर्थिक जिम्मेदारियां हैं। हालांकि, क्रेडिट सिस्टम में जल्दी एंट्री लेंडर्स को रिस्क का बेहतर अंदाज़ा लगाने का मौका देती है, लेकिन यह कर्ज के तेजी से बढ़ने का खतरा भी बढ़ाती है। अगर युवा अपनी कर्ज चुकाने की क्षमता को कम आंकते हैं, तो इससे डिफॉल्सी (delinquency) यानी लोन डिफॉल्ट की दरें बढ़ सकती हैं।

निवेशकों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह ट्रेंड उन लेंडर्स को कैसे प्रभावित करेगा जो अनसिक्योर्ड रिटेल क्रेडिट पर ज़्यादा निर्भर हैं। जैसे-जैसे इंडस्ट्री इस नए कस्टमर प्रोफाइल के साथ तालमेल बिठाएगी, युवा और बार-बार क्रेडिट लेने वाले ग्राहकों के लिए रिस्क को सटीक तरीके से आंकने की लेंडर्स की काबिलियत लंबी अवधि की प्रॉफिटेबिलिटी का एक अहम पैमाना बनेगी। भविष्य में क्रेडिट ब्यूरो और लेंडर्स की रिपोर्ट युवा ग्राहकों के पोर्टफोलियो पर खास नज़र रखने वाली होंगी।

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