EU ट्रेड डील से पहले भारत को फूड सेफ्टी में सुधार की ज़रूरत: GTRI की चेतावनी

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AuthorAditya Rao|Published at:
EU ट्रेड डील से पहले भारत को फूड सेफ्टी में सुधार की ज़रूरत: GTRI की चेतावनी

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से पहले, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर डोमेस्टिक स्टैंडर्ड्स और इम्पोर्ट इंस्पेक्शन सिस्टम को आधुनिक नहीं बनाया गया, तो भारतीय कृषि निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है, वहीं घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

Detailed Coverage

EU ट्रेड डील और भारत की खाद्य सुरक्षा चुनौतियां

जैसे-जैसे भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है, जिसकी उम्मीद 2026 के अंत तक है, विशेषज्ञों ने देश की खाद्य सुरक्षा तैयारियों पर चिंता जताई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को एक संतुलित व्यापारिक संबंध सुनिश्चित करने के लिए अपनी खाद्य सुरक्षा प्रणालियों को तुरंत आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान ढांचा घरेलू किसानों और निर्यातकों को नुकसान पहुंचा सकता है।

खाद्य निर्यात अनुपालन में बाधाएं

यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक रूप से भारतीय कृषि उत्पादों के खिलाफ सैकड़ों खाद्य सुरक्षा सूचनाएं जारी की हैं, जिसके कारण अक्सर सीमा पर उत्पादों को अस्वीकार (rejection) किया गया है और महंगी रिकॉल (recall) की नौबत आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, EU का सख्त रेगुलेटरी माहौल अक्सर भारतीय निर्यातकों के लिए व्यापार में एक बाधा साबित होता है। GTRI द्वारा उजागर की गई एक मुख्य चिंता यह है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा माने जाने वाले कम टैरिफ भी निर्यात को बढ़ावा देने में विफल हो सकते हैं, यदि भारतीय कृषि उत्पाद यूरोपीय सुरक्षा अनुपालन मानकों पर खरे उतरने में संघर्ष करते रहे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि EU प्रति हेक्टेयर औसतन 2.67 किलोग्राम कीटनाशकों का उपयोग करता है, जो भारत के 0.24 किलोग्राम के उपयोग से काफी ज़्यादा है, फिर भी भारतीय उत्पादों को अक्सर सख्त सीमा जांच का सामना करना पड़ता है।

आयात और घरेलू मानकों को मज़बूत करना

यह रिपोर्ट भारत के भीतर एक विज्ञान-आधारित और पारस्परिकता पर आधारित खाद्य सुरक्षा ढांचे की वकालत करती है। इसमें फार्म-टू-पोर्ट (farm-to-port) ट्रेसबिलिटी (traceability) को लागू करना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं का विस्तार करना और लगातार अवशेष निगरानी (residue monitoring) सुनिश्चित करना शामिल है। वर्तमान में, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) जैसे अधिकारियों द्वारा प्रवर्तन (enforcement) एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अधिक सख्ती की आवश्यकता देखी जा रही है। रिपोर्ट का तर्क है कि भारतीय निर्यात पर लागू होने वाले कठोर निरीक्षण मानकों के साथ आयातित भोजन को समान रूप से मानना, भारत को अपने घरेलू हितों की बेहतर रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दायित्वों को बनाए रखने में मदद कर सकता है।

भविष्य की निगरानी और संस्थागत सहायता

प्रतिस्पर्धात्मकता (competitiveness) में सुधार के लिए, GTRI एक विशेष खाद्य-सुरक्षा निगरानी और प्रतिक्रिया सेल (Food-Safety Monitoring and Response Cell) बनाने की सिफारिश करता है। यह इकाई वैश्विक बाजारों में नियामक परिवर्तनों को ट्रैक करने और भारतीय निर्यातकों को रियल-टाइम अलर्ट प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे उन्हें बदलते अनुपालन आवश्यकताओं के अनुकूल होने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट चीन के उदाहरण की ओर इशारा करती है, जिसने 2013 और 2019 के बीच यूरोपीय शिपमेंट से खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की अनुमति देने वाला एक सख्त, विज्ञान-आधारित निरीक्षण व्यवस्था स्थापित की थी। भारतीय निवेशकों के लिए, ध्यान इस बात पर बना हुआ है कि क्या ये प्रणालीगत सुधार कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक निर्यात क्षमता का समर्थन करने के लिए लागू किए जाएंगे। आने वाले महीनों के लिए प्राथमिक मॉनिटरेबल (monitorable) यह होगा कि सरकार इस व्यापार सौदे की अंतिम बातचीत के दौरान इन सुरक्षा ढांचे समायोजनों पर क्या रुख अपनाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.