नॉमिनल ग्रोथ या असली मजबूती?
फरवरी 2026 के लिए ₹1.83 लाख करोड़ का GST कलेक्शन, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 8.1% ज्यादा है, देश की आर्थिक रफ्तार को दर्शाता है। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अब तक कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹20.27 लाख करोड़ हो चुका है, जो पिछले साल से 8.3% अधिक है। रिफंड (Refunds) में 10.2% की बढ़ोतरी के बाद, ₹22,595 करोड़ का रिफंड एडजस्ट करने के बाद, नेट रेवेन्यू ₹1.61 लाख करोड़ रहा। यह सरकार के FY26 के लिए ₹11.78 लाख करोड़ के सालाना GST कलेक्शन के लक्ष्य के अनुरूप है।
GDP और महंगाई का असर
हालांकि, 8.1% की यह सालाना बढ़ोतरी अच्छी खबर है, लेकिन इसकी असली अहमियत को मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) माहौल में देखना होगा। भारत का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) तेजी से बढ़ रहा है, FY26 के लिए अनुमान 7.6% और FY27 के लिए 7% से 7.4% के बीच है। इस आर्थिक विस्तार से टैक्स कलेक्शन को स्वाभाविक रूप से बढ़ावा मिलता है। लेकिन, जनवरी 2026 तक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इन्फ्लेशन (Inflation) 2.75% रहा। वहीं, FY27 में इसके बढ़कर 4.3% होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि GST कलेक्शन में दिखने वाली नॉमिनल ग्रोथ (Nominal Growth) का एक हिस्सा सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से हो सकता है, न कि सामान और सेवाओं की ज्यादा बिक्री की वजह से। साल-दर-साल 8.3% की ग्रोथ भी सरकार के पूरे साल के अनुमान से थोड़ी कम है, इसलिए रेवेन्यू पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
राज्यों के बीच बढ़ती खाई
देश के बड़े औद्योगिक राज्य जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक GST रेवेन्यू में सबसे बड़े योगदानकर्ता बने हुए हैं। लेकिन, गहराई से देखें तो राज्यों के बीच वित्तीय असमानताएं काफी ज्यादा हैं। सेटलमेंट के बाद स्टेट GST (SGST) रेवेन्यू का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, कुछ राज्यों में फरवरी 2026 में इसमें गिरावट भी देखी गई। CAG (Comptroller and Auditor General) की एक स्टडी ने बताया है कि GST से राज्यों के अपने टैक्स रेवेन्यू तो बढ़े हैं, लेकिन इसका फायदा समान रूप से नहीं बंटा है। इससे भारत के वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) में सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) और समान विकास को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यह असमान वितरण बताता है कि राष्ट्रीय आंकड़े शायद कुछ क्षेत्रों में रेवेन्यू जुटाने की अंदरूनी चुनौतियों को छिपा रहे हैं।
भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं
मासिक कलेक्शन के आंकड़ों के अलावा, कुछ स्ट्रक्चरल (Structural) मुद्दे भी ध्यान देने लायक हैं। GST 2.0 को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, जिसमें टैक्स स्लैब (Rate Slabs) को एक साथ लाना और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल शामिल है। 1 फरवरी 2026 को कंपेंसेशन सेस (Compensation Cess) का खत्म होना भी MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) कंप्लायंस (Compliance) और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के लिए एक नया पहलू लाता है। हालांकि एनालिस्ट (Analysts) भारत की GDP ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव हैं, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी इन स्ट्रक्चरल मुद्दों को प्रभावी ढंग से हल करने पर निर्भर करेगी। उदाहरण के लिए, FY26 की तीसरी तिमाही में कोर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (Core Industrial Production) की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में धीमी रही, जो बताता है कि अर्थव्यवस्था बढ़ तो रही है, लेकिन अलग-अलग सेक्टरों में रफ्तार अलग-अलग हो सकती है। आगे चलकर, FY26 के लिए नॉमिनल GDP ग्रोथ लगभग 8.6% रहने का अनुमान है। लगातार आर्थिक गतिविधि, टैक्स सुधारों और वैश्विक व्यापार के बदलते माहौल को देखते हुए, भविष्य के GST कलेक्शन के रुझान तय होंगे। यह देखना अहम होगा कि सरकार क्षेत्रीय वित्तीय असंतुलन को कैसे संभालती है और यह सुनिश्चित करती है कि रेवेन्यू ग्रोथ सभी क्षेत्रों में समान हो।