GST के 9 साल: कंपनियां बोलीं - 'सरल कंप्लायंस और जल्दी रिफंड दो'

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
GST के 9 साल: कंपनियां बोलीं - 'सरल कंप्लायंस और जल्दी रिफंड दो'

GST को लागू हुए 9 साल हो गए हैं। इस मौके पर कंपनियों का कहना है कि एक देश, एक टैक्स से फायदा तो हुआ है, लेकिन अब कंप्लायंस (compliance) को और आसान बनाने और रिफंड (refund) जल्दी मिलने की जरूरत है। KPMG-FICCI की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि भले ही डिजिटल तरीके अपनाए जा रहे हैं, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का मिलान और रजिस्ट्रेशन जैसी जटिल प्रक्रियाएं कंपनियों के वर्किंग कैपिटल (working capital) पर भारी पड़ रही हैं।

कंप्लायंस और रिफंड में कहां आ रही दिक्कतें?

टैक्स प्रक्रिया के कई हिस्से डिजिटलाइजेशन से आसान हुए हैं, लेकिन कंपनियों के लिए अभी भी कई मुश्किलें बनी हुई हैं। ताजा सर्वे के मुताबिक, करीब 59% कंपनियों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अभी भी जटिल लगती है। वे चाहते हैं कि रजिस्ट्रेशन में ऑटोमैटिक अप्रूवल मिले और कई राज्यों में काम करने वाली कंपनियों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम हो।

रजिस्ट्रेशन के अलावा, रिटर्न फाइल करने की जटिलता भी एक बड़ी समस्या है। 57% लोगों का कहना है कि रिटर्न फाइल करना मध्यम रूप से जटिल है। इसलिए, अब ऑटो-फिल्ड रिटर्न और ज्यादा स्पष्ट समय-सीमा की मांग बढ़ रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता टैक्स रिफंड मिलने में देरी की है, खासकर उन एक्सपोर्टर्स (exporters) और कंपनियों के लिए जिनका इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ज्यादा है। जब इनपुट्स पर चुकाया गया टैक्स फाइनल आउटपुट पर लगने वाले टैक्स से ज्यादा हो जाता है, तो ITC जमा होने लगता है और कंपनी का पैसा फंस जाता है। वर्किंग कैपिटल (working capital) की इस दिक्कत को दूर करने के लिए कंपनियां अब सिस्टम-ड्रिवन रिफंड चाहती हैं, जिसमें कम से कम मैन्युअल दखल हो।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और भविष्य के सुधार

आजकल टेक्नोलॉजी, कंपनियों और टैक्स डिपार्टमेंट के बीच रिश्ते को आकार दे रही है। जहां 46% कंपनियां अपने GST ऑपरेशन्स को डिजिटाइज करने में मध्यम रूप से सफल हैं, वहीं कई कंपनियां अभी भी पुरानी सिस्टम को नए सिस्टम से जोड़ने और डेटा मिलान की चुनौतियों से जूझ रही हैं। इसके अलावा, 32% कंपनियां अपने कंप्लायंस (compliance) को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही हैं, हालांकि इसे लागू करने की ऊंची लागत कुछ के लिए एक बाधा बनी हुई है।

आगे चलकर, इंडस्ट्री की मुख्य मांग है कि टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (tax administration) में मुकदमेबाजी कम हो और ज्यादा निश्चितता आए। जैसे-जैसे सिस्टम परिपक्व हो रहा है, कंप्लायंस से जुड़े समय और लागत को कम करने पर ध्यान बना रहेगा। निवेशकों को भविष्य में टैक्स स्लैब (tax slab) को तर्कसंगत बनाने या ITC मैकेनिज्म (ITC mechanism) को सरल बनाने वाली किसी भी नीतिगत बदलाव पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये बदलाव मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) और कंज्यूमर गुड्स (consumer goods) जैसे जटिल सप्लाई चेन वाले सेक्टर्स के कैश फ्लो (cash flow) और प्रॉफिट मार्जिन (profit margin) को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.