भारतीय शेयर बाज़ार आज एक सतर्क चाल के साथ खुल सकते हैं। अमेरिका से मिले सकारात्मक इन्फ्लेशन (Inflation) डेटा और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाज़ार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। घरेलू इंडेक्स **24,000** का स्तर बनाए रखने की कोशिश करेंगे, लेकिन एनर्जी की बढ़ती लागत निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
ग्लोबल संकेत और घरेलू बाज़ार का हाल
आज भारतीय शेयर बाज़ार में एक मामूली शुरुआत की उम्मीद है। GIFT Nifty फ्यूचर्स में ज़्यादा हलचल नहीं दिख रही है। पिछले ट्रेडिंग सेशन में Nifty 50 24,078.50 पर और Sensex 77,185.43 पर बंद हुआ था। घरेलू इंडेक्स भले ही मजबूती दिखा रहे हों, लेकिन निवेशकों की नज़र अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक दबावों पर बनी हुई है।
ग्लोबल सेंटीमेंट पर असर
निवेशकों की भावनाएं फिलहाल दो अलग-अलग कहानियों के बीच झूल रही हैं। एक ओर, अमेरिका के बाज़ारों को उम्मीद से कम आए इन्फ्लेशन (Inflation) डेटा से सहारा मिला है। इससे संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर ज़्यादा आक्रामक रुख नहीं अपनाएगा। अमेरिका के बड़े वित्तीय संस्थानों की तरफ से आए अच्छे नतीजों ने S&P 500 और Nasdaq जैसे बड़े इंडेक्स को भी सहारा दिया। हालांकि, एशियाई बाज़ार इस तेज़ी को थामे रखने में संघर्ष कर रहे हैं। जापान और साउथ कोरिया में गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण प्रमुख इंडस्ट्री के नतीजों से पहले सेमीकंडक्टर स्टॉक्स पर पड़ रहा दबाव है।
बढ़ती एनर्जी कीमतों का असर
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी है, जो अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण $85 प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं। इस हफ़्ते तेल की कीमतों में करीब 12% का उछाल आया है। यह भारत के इम्पोर्ट बिल, करेंसी और ऊर्जा पर निर्भर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) की चेतावनी के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है, जिस पर निवेशक कड़ी नज़र रख रहे हैं।
डोमेस्टिक मार्केट की चाल
हाल के ट्रेडिंग पैटर्न में फॉरेन और डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशंस के बीच एक विभाजन दिख रहा है। बुधवार को फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने ₹735 करोड़ के शेयर बेच दिए। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹704 करोड़ की खरीदारी करके बाज़ार को सहारा दिया। डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स की लगातार छठी खरीदारी ने बाज़ार को गिरने से बचाया है।
तकनीकी रूप से, Nifty का 24,000 के ऊपर बने रहना एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर को बनाए रखने में नाकाम रहता है, तो 23,800 से 23,900 के स्तर तक और बिकवाली का दबाव दिख सकता है। ऊपर की ओर, इंडेक्स को 24,200 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस (Resistance) का सामना करना पड़ेगा। निवेशक यह देखने की कोशिश करेंगे कि क्या घरेलू बाज़ार, क्षेत्रीय एशियाई बाज़ारों की कमजोरी को नज़रअंदाज़ करके आंतरिक आय (Earnings) और भारत-यूके व्यापार समझौते जैसे विकासों से होने वाले दीर्घकालिक आर्थिक लाभ पर ध्यान केंद्रित कर पाता है।
