भारतीय शेयर बाज़ार में आज तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT Nifty 150 अंकों से ज़्यादा ऊपर चल रहा है। अमेरिकी ब्याज दरों पर कम होती चिंताएं और कच्चे तेल की गिरती कीमतों के बीच यह सकारात्मक रुझान निफ्टी और सेंसेक्स के हालिया लाभ को जारी रख सकता है।
क्या हुआ?
भारतीय शेयर बाज़ारों में आज, शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को, तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है। GIFT Nifty फ्यूचर्स 150 अंकों से ज़्यादा ऊपर कारोबार कर रहे हैं। यह सुबह का रुझान गुरुवार के प्रदर्शन को जारी रखने का संकेत देता है, जब निफ्टी 50 और सेंसेक्स लगातार दूसरे दिन हरे निशान में बंद हुए थे। गुरुवार को निफ्टी 24,175.70 पर बंद हुआ, जो 0.71% की बढ़त थी, जबकि सेंसेक्स 579.48 अंक चढ़कर 77,502.12 पर बंद हुआ।
ग्लोबल फैक्टर्स क्यों मायने रखते हैं?
इस तेज़ी का मुख्य कारण अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदों में बदलाव है। अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों (U.S. jobs data) के नरम रहने से फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं, जो अक्सर ग्लोबल मार्केट की लिक्विडिटी को प्रभावित करती हैं। जब अमेरिका में उधार लेने की लागत स्थिर नज़र आती है, तो यह आमतौर पर भारत जैसे उभरते बाज़ारों के लिए ज़्यादा अनुकूल माहौल बनाती है।
तेल की कीमतें और ऊर्जा आयात पर असर
कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल कई महीनों के निचले स्तर के करीब हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) लगभग $72.1 प्रति बैरल और WTI करीब $68.8 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। भारत, जो कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (net importer) है, के लिए कम कीमतें एक सहायक कारक हैं। तेल की कम कीमतों से देश के आयात बिल (import bill) को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है, जिसका भुगतान संतुलन (balance of payments) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और कॉर्पोरेट मार्जिन को सहारा मिल सकता है, खासकर तेल विपणन कंपनियों (oil marketing companies), पेंट और रसायन जैसे क्षेत्रों के लिए।
ग्लोबल मार्केट्स से मिले-जुले संकेत
जबकि भारतीय बाज़ार अनुकूल स्थानीय और अमेरिकी मैक्रो डेटा पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, ग्लोबल संकेत मिले-जुले बने हुए हैं। अमेरिकी डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) एप्पल (Apple) जैसी कंपनियों के लाभ से प्रेरित होकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। इसके विपरीत, सेमीकंडक्टर स्टॉक्स (semiconductor stocks) की बिकवाली के कारण टेक्नोलॉजी-केंद्रित नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) पर दबाव देखा गया। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की इस अस्थिरता का असर फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स (Philadelphia Semiconductor Index) में तेज गिरावट के रूप में देखा गया। नतीजतन, एशियाई बाज़ारों में आज सतर्कता का रुझान रहा, जहाँ जापान का निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) में कुछ बिकवाली का दबाव देखा गया, जबकि क्षेत्रीय सूचकांकों में मामूली उतार-चढ़ाव रहा।
निवेशक क्या ट्रैक करें?
बाज़ार के आगे बढ़ने के साथ, निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) की गतिविधि होगी। जबकि घरेलू संकेतक मज़बूत हैं, FII हाल ही में शुद्ध बिकवाल (net sellers) रहे हैं, और निफ्टी को 24,000 के निशान से ऊपर बनाए रखने के लिए उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। तकनीकी रूप से, बाज़ार पर्यवेक्षक देखेंगे कि क्या निफ्टी 24,200 से 24,250 के तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र (resistance zone) को पार कर पाता है। नीचे की ओर, 24,000 का स्तर एक प्रमुख समर्थन स्तर (support level) बना हुआ है, जिसके बाद 23,800-23,900 की सीमा आती है।
