सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में तेजी की उम्मीद है क्योंकि GIFT Nifty में 130 अंकों की बढ़त देखी गई है। यह उछाल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट के बाद आया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब घरेलू बेंचमार्क पांच दिनों की गिरावट के दौर से गुजर रहे थे।
Detailed Coverage
बाज़ारों पर कम तेल कीमतों का असर
मध्य-पूर्व में तनाव कम होने और कूटनीतिक रास्ते खुलने की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 5.2% लुढ़क कर $91.73 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 5.4% गिरकर $84.45 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। भारत, जो अपनी तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, के लिए यह एक बड़ी राहत की बात है। तेल की कम कीमतें आयात बिल घटाने, रुपये को मजबूत करने और महंगाई को कम करने में मदद करेंगी, जो कि नीति निर्माताओं और निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है।
संस्थागत निवेशकों की गतिविधि
पिछले ट्रेडिंग सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली जारी रही, जिन्होंने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों से मिले आंकड़ों के अनुसार ₹3,892 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹5,453 करोड़ की शुद्ध खरीदारी करके बाज़ार को सहारा दिया। घरेलू फंडों का यह लगातार समर्थन हालिया बाज़ार लिक्विडिटी में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है।
निवेशक की भावना को प्रभावित करने वाले कारक
वैश्विक बाज़ार अभी भी केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कॉर्पोरेट आय पर नज़र बनाए हुए हैं। शुक्रवार को अमेरिकी बाज़ार में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और एसएंडपी 500 में मामूली बढ़त देखी गई, वहीं नैस्डैक पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च को लेकर निवेशकों की जांच के कारण दबाव रहा। भारतीय बाज़ार के निवेशक संभवतः देखेंगे कि ये वैश्विक संकेत, कमोडिटी की कीमतों में नरमी के साथ मिलकर, दिन भर की ट्रेडिंग को कैसे प्रभावित करते हैं। आने वाले सत्रों के लिए मुख्य निगरानी यह होगी कि क्या सेंटिमेंट में सुधार जारी रहता है या वैश्विक ब्याज दरें और कॉर्पोरेट लाभप्रदता संबंधी चिंताएं बाज़ार की दिशा तय करती रहती हैं।
