GIFT Nifty में 100 अंकों की तेजी: भारतीय बाज़ार आज खुलेंगे मजबूती के साथ

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
GIFT Nifty में 100 अंकों की तेजी: भारतीय बाज़ार आज खुलेंगे मजबूती के साथ

GIFT Nifty फ्यूचर्स में **100** अंकों से ज़्यादा की तेज़ी देखी जा रही है, जो आज भारतीय बाज़ारों में एक पॉज़िटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है। अमेरिकी बाज़ारों की पिछली रात की तेज़ी से सहारा मिल रहा है, लेकिन निवेशकों की नज़र विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनावों के चलते बढ़ते कच्चे तेल के दामों पर भी रहेगी।

क्या हुआ आज?

बुधवार को भारतीय इक्विटी बाज़ार हरे निशान में खुलने की उम्मीद है। GIFT Nifty फ्यूचर्स में 100 अंकों से ज़्यादा का उछाल दिख रहा है। यह तेज़ी अमेरिकी शेयर बाज़ारों में पिछली रात आई मज़बूत रिकवरी के बाद आई है, जिससे वैश्विक निवेशक सेंटिमेंट में सुधार हुआ है। यह अपडेट 30 जून के उस सत्र के बाद आया है, जब मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते भारत के बेंचमार्क इंडेक्स निचले स्तर पर बंद हुए थे।

ग्लोबल मार्केट का कनेक्शन

GIFT Nifty में दिख रहा यह Optimism मुख्य रूप से अमेरिकी इंडाइसेज के प्रदर्शन से प्रेरित है। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) और एस एंड पी 500 (S&P 500) दोनों मंगलवार को ऊपर बंद हुए। टेक्नोलॉजी शेयरों पर दोबारा ध्यान केंद्रित होने और आगामी अर्निंग्स रिपोर्ट्स को लेकर Optimism ने इसे बढ़ावा दिया। वॉल स्ट्रीट पर यह रिकवरी अक्सर ट्रेडिंग की शुरुआत में भारतीय बाज़ारों के लिए एक टेलविंड (tailwind) का काम करती है।

FII की बिकवाली की चिंता

पॉज़िटिव ओपनिंग के संकेत के बावजूद, बाज़ार के लिए एक बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का ट्रेंड बनी हुई है। 30 जून को, विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटीज़ में लगभग ₹2,556 करोड़ की नेट बिकवाली की। घरेलू निवेशकों ने ₹6,842 करोड़ की नेट खरीदारी से सहारा दिया, लेकिन विदेशी फंड्स की लगातार बिकवाली बाज़ार में बढ़त को सीमित करने और लिक्विडिटी (liquidity) को प्रभावित करने वाला एक मुख्य कारक बनी हुई है।

भू-राजनीतिक जोखिम और तेल

निवेशक भू-राजनीतिक विकास पर भी नज़र रख रहे हैं जो बाज़ार की अस्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है, ब्रेंट क्रूड (Brent crude) लगभग $73.3 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह वृद्धि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता के कारण जुड़ी हुई है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, बढ़ती तेल की कीमतें अक्सर एक नकारात्मक कारक मानी जाती हैं, क्योंकि वे आयात लागत बढ़ा सकती हैं और ईंधन या पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर निर्भर क्षेत्रों की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं।

देखने योग्य टेक्निकल लेवल्स

जो लोग निफ्टी 50 (Nifty 50) की निगरानी कर रहे हैं, उनके लिए इंडेक्स को 24,000 के स्तर पर तत्काल रजिस्टेंस (resistance) का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का सुझाव है कि बुलिश मोमेंटम (bullish momentum) को फिर से जगाने के लिए 24,200 से ऊपर एक निर्णायक चाल की आवश्यकता होगी। नीचे की ओर, 23,800 को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के रूप में पहचाना गया है। पिछले सत्र में इंडेक्स 23,900 से थोड़ा नीचे बंद हुआ था, जिससे अल्पकालिक सेंटिमेंट के लिए इन टेक्निकल लेवल्स को ट्रैक करना महत्वपूर्ण हो गया है।

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