GIFT Nifty में मजबूती के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GIFT Nifty में मजबूती के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद

भारतीय शेयर बाज़ार में आज, 2 जुलाई 2026 को, एक सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है। GIFT Nifty में **150** अंकों की तेज़ी देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। हालांकि, विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और घरेलू निवेशकों (DIIs) की लगातार खरीदारी के बीच बाज़ार का सेंटिमेंट दिलचस्प बना हुआ है।

बाज़ार की आज की चाल

भारतीय शेयर बाज़ारों में आज, गुरुवार 2 जुलाई 2026 को, एक शानदार शुरुआत की उम्मीद है। GIFT Nifty, जो भारतीय बाज़ार की दिशा का संकेत देता है, में 150 अंकों का उछाल देखा गया है। यह तेज़ी बताती है कि सेंसेक्स और निफ्टी, पिछले कारोबारी दिन की बढ़त को जारी रखने के लिए तैयार हैं।

गिरते तेल की कीमतों का असर

इस सकारात्मक माहौल के पीछे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट सबसे बड़ा कारण है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) लगभग $70.7 प्रति बैरल तक गिर गया है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $67.7 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें कम होने से देश के इम्पोर्ट बिल में कमी आती है और महंगाई का दबाव भी कम होता है। यह ट्रांसपोर्ट, पेंट और एविएशन जैसे सेक्टर्स की कंपनियों के लिए फायदेमंद है।

FIIs vs DIIs: कौन भारी?

बाज़ार की चाल सकारात्मक दिख रही है, लेकिन निवेशकों को संस्थागत निवेशकों के बीच चल रहे इस खेल पर नज़र रखनी चाहिए। 1 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,140 करोड़ के शेयर बेच दिए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इसी अवधि में ₹3,159 करोड़ के शेयर खरीदकर बाज़ार को संभाला। यह लगातार सातवां सत्र है जब घरेलू निवेशकों ने बिकवाली के दबाव को झेलते हुए बाज़ार को सहारा दिया है।

ग्लोबल संकेत और टेक सेक्टर पर दबाव

वैश्विक बाज़ारों का नज़ारा मिला-जुला है। अमेरिकी फ्यूचर्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी सेक्टर, खासकर सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में नरमी देखी जा रही है। इसका असर एशियाई बाज़ारों पर भी पड़ा है, जहां टेक-हैवी इंडेक्स दबाव में हैं। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में सकारात्मक प्रगति ने सप्लाई चेन में संभावित बाधाओं को लेकर चिंता को कम किया है, जिससे बाज़ार का सेंटिमेंट मज़बूत बना हुआ है।

ट्रेडर्स के लिए अहम स्तर

निफ्टी इंडेक्स 24,000 का स्तर पार कर चुका है, जिसे साइकोलॉजिकल सपोर्ट माना जाता है। मौजूदा टेक्निकल ट्रेंड के अनुसार, इंडेक्स को 24,100 और 24,200 के बीच तत्काल प्रतिरोध (resistance) का सामना करना पड़ रहा है। यदि इंडेक्स इन स्तरों से ऊपर बना रहता है, तो यह 24,400 की ओर बढ़ सकता है। नीचे की ओर, 23,785 से 23,900 की रेंज में सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

बैंक निफ्टी की बात करें तो, जब तक यह 58,000 के स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक इसकी चाल सकारात्मक है। इंडेक्स को 58,200 से 58,300 के ज़ोन में प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 57,440 से 57,500 के आसपास सपोर्ट की उम्मीद है।

आगे क्या देखना महत्वपूर्ण है?

निवेशकों को दो मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए। पहला, FIIs की बिकवाली और DIIs की खरीदारी का रुझान, जो बाज़ार में लिक्विडिटी तय करेगा। दूसरा, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट कितनी टिकाऊ रहती है, यह सेक्टर-स्पेसिफिक मोमेंटम बनाए रखने के लिए अहम होगा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कोई भी बड़ा बदलाव भी दिन भर कमोडिटी की कीमतों और बाज़ार की अस्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

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