Forex Reserves Record High: भारत का खजाना भरा, फिर भी रुपया क्यों बेहाल?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Forex Reserves Record High: भारत का खजाना भरा, फिर भी रुपया क्यों बेहाल?
Overview

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) **$725.7 अरब डॉलर** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन, इस मजबूती के बावजूद, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।

विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड पर, पर क्यों सहम रहा रुपया?

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) ने $725.7 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया है। विदेशी मुद्रा संपत्ति (foreign currency assets) और सोने की बढ़ती होल्डिंग ने इस रिकॉर्ड को बनाने में मदद की है। लेकिन, बाजार में यह मजबूती फिलहाल भारतीय रुपये को सहारा नहीं दे पा रही है। शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.34% लुढ़ककर 90.99 के स्तर पर बंद हुआ।

RBI की दखल से थमी गिरावट

शुक्रवार को रुपया 91.05-91.08 के आसपास खुला, लेकिन जल्द ही 90.95 के स्तर पर लौट आया। ट्रेडर्स का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से स्थानीय स्पॉट मार्केट खुलने से पहले डॉलर बेचने (intervention) की वजह से यह स्थिरता आई। RBI की इस सक्रिय दखलअंदाजी ने रुपये को 91/$ के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने से रोका। हालांकि, छुट्टियों की वजह से बाजार में कम लिक्विडिटी (thin holiday liquidity) और ऑफशोर डॉलर की मजबूत मांग ने दबाव बनाए रखा।

भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का झटका

रुपये की इस कमजोरी की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर। इन चिंताओं के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंचकर $71.50-$72.04 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं। भारत, जो अपनी 85% से अधिक तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, के लिए तेल के बढ़ते दाम इंपोर्टेड महंगाई (imported inflation) को बढ़ा सकते हैं, फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) को चौड़ा कर सकते हैं और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।

बॉन्ड यील्ड्स में मामूली उछाल, सेंटिमेंट पर असर

इन भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते बाजार में सतर्कता का माहौल है। शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (Benchmark 10-year government bond yield) में मामूली बढ़ोतरी हुई और यह 6.72% पर बंद हुआ।

ग्लोबल संकेतों के बीच रुपया क्यों फिसला?

आंकड़ों के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 को समाप्त हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड $725.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। यह भंडार लगभग एक साल के आयात और 96% बाहरी कर्ज को कवर करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, इसके बावजूद, रुपया हाल ही में कमजोर हुआ है। 6 फरवरी 2026 को समाप्त हफ्ते में भंडार $6.71 अरब डॉलर घटकर $717.06 अरब डॉलर पर आ गया था। इस गिरावट में सोने के भंडार में आई करीब $14.2 अरब डॉलर की कमी का बड़ा हाथ था।

एक ओर जहां अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 97.91 के आसपास कारोबार कर रहा था और पिछले हफ्ते 0.8% गिरा था, वहीं उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। फेड की पिछली मीटिंग के मिनट्स से संकेत मिला कि महंगाई पर काबू पाने के लिए और दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। इस hawkish रुख और मौजूदा अनिश्चितता के माहौल में उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव है, और भारतीय रुपया भी अपने क्षेत्रीय साथियों से पीछे प्रदर्शन कर रहा है।

आगे क्या?

जानकारों का मानना है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर की चाल के चलते आने वाले समय में रुपये में अस्थिरता जारी रह सकती है। USD-INR स्पॉट की कीमतें ₹90.70 से ₹91.30 के दायरे में रह सकती हैं। RBI को बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी पड़ सकती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.