Indian Equities में विदेशी निवेशकों की वापसी! बिकवाली के बाद बढ़ा इंटरेस्ट

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Equities में विदेशी निवेशकों की वापसी! बिकवाली के बाद बढ़ा इंटरेस्ट

हालिया बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय शेयरों में फिर से दिलचस्पी दिखा रहे हैं। निवेशकों को अब भारतीय शेयर बाजार में वैल्यूएशन (Valuation) अधिक आकर्षक लग रहा है। हालांकि, GST कलेक्शन और क्रेडिट ग्रोथ जैसे इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Economic Indicators) मजबूत बने हुए हैं, पर ग्लोबल ऑयल प्राइस (Global Oil Prices) और जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risks) पर नजरें रहेंगी।

बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की रुचि में इजाफा

लंबे समय तक बिकवाली का दबाव झेलने के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अब भारतीय इक्विटी (Equity) की ओर वापस आते दिख रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाल के दिनों में शेयरों की कीमतों में आई नरमी के कारण वैल्यूएशन (Valuation) पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर हो गए हैं। साल की शुरुआत में, जब कीमतें ऊंची थीं और दूसरे ग्लोबल मार्केट्स में ज्यादा रिटर्न मिल रहा था, तब विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पैसा निकाला था।

घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और चुनौतियाँ

विदेशी पूंजी के हालिया बहिर्वाह के बावजूद, भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत दिख रहे हैं। ऑटोमोबाइल बिक्री (Automobile Sales) और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन जैसे क्षेत्रों में लगातार ग्रोथ जारी है। इसके अलावा, क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) में भी जबरदस्त तेजी आई है, जो पिछले अवधियों के 9-10% के मुकाबले बढ़कर लगभग 18% तक पहुंच गई है। यह मजबूत क्रेडिट फ्लो बिजनेस एक्टिविटी को सपोर्ट कर रहा है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए यह एक चुनौती भी है, क्योंकि उन्हें ग्रोथ को बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति (Inflation) के जोखिमों को रोकने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को टाइट करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

ग्लोबल माहौल का असर

बाजार की भावना (Sentiment) स्थिर हो रही है, लेकिन निवेशक अभी भी बाहरी जोखिमों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions), खासकर मध्य पूर्व (Middle East) में, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों (International Oil Prices) को प्रभावित कर रही हैं। चूँकि भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (Importer) है, एनर्जी मार्केट्स में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर देश के फॉरेन एक्सचेंज बैलेंस (Foreign Exchange Balance) और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को प्रभावित करती है। ये ग्लोबल अनिश्चितताएं विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं।

बॉन्ड मार्केट का आउटलुक

हाल की चर्चाओं में भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स (Bloomberg Global Aggregate Bond Index) जैसे ग्लोबल बेंचमार्क में शामिल करने पर भी बात हुई है। हालांकि इस प्रक्रिया में देरी हुई है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह भारत के सॉवरेन डेट (Sovereign Debt) में किसी कमजोरी का संकेत नहीं है। इसे ग्लोबल बेंचमार्क प्रोवाइडर्स द्वारा एक सतर्क कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो इमर्जिंग मार्केट (Emerging Market) की स्थितियों में स्थिरता की तलाश में हैं। डोमेस्टिक डेट मार्केट (Domestic Debt Market) को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक माना जा रहा है, जब ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) की स्थितियाँ अनुकूल होंगी।

आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक तेल की कीमतों का रुख और उनका भारत के करंट अकाउंट बैलेंस (Current Account Balance) पर पड़ने वाला असर होगा। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का ब्याज दरों (Interest Rates) पर रुख भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि केंद्रीय बैंक हाई क्रेडिट ग्रोथ और महंगाई को कंट्रोल करने के दोहरे उद्देश्यों को साधने की कोशिश करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.