Indian Stocks: विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹580 मिलियन, ग्लोबल बिकवाली का असर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Stocks: विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹580 मिलियन, ग्लोबल बिकवाली का असर

पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ारों से **$580 मिलियन** निकाले हैं। ग्लोबल बाज़ारों में आई मंदी और AI-थीम से हटते हुए निवेशकों के रुझान के चलते यह बिकवाली देखी जा रही है।

ग्लोबल बाज़ार में मंदी का दौर

दुनिया भर के शेयर बाज़ार इस वक्त बड़ी उथल-पुथल से गुज़र रहे हैं। पिछले हफ़्ते अमेरिकी इक्विटी फंड्स से $17 बिलियन निकाले गए, जो लगातार दूसरे हफ़्ते की गिरावट है। ऐसा लग रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से प्रेरित तेज़ निवेश की रफ़्तार अब धीमी पड़ रही है।

उभरते बाज़ारों पर मार

भारत जैसे उभरते हुए बाज़ारों पर भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इन क्षेत्रों पर केंद्रित इक्विटी फंड्स पिछले नौ हफ़्ते से लगातार गिरावट झेल रहे हैं, जो 2022-2023 के बाद सबसे लंबा सिलसिला है। पिछले हफ़्ते वैश्विक स्तर पर $2 बिलियन का आउटफ्लो हुआ, लेकिन इसका असर देशों पर अलग-अलग रहा। ताइवान में $766 मिलियन की भारी निकासी देखी गई, वहीं ब्राज़ील से पिछले सात हफ़्ते में करीब $2 बिलियन बाहर जा चुके हैं।

भारतीय बाज़ार में कितनी बिकवाली?

भारत में विदेशी बिकवाली फिर से बढ़ गई है। पिछले हफ़्ते विदेशी निवेशकों ने $580 मिलियन निकाले, जबकि उससे पिछले हफ़्ते यह रकम $94 मिलियन थी। इसमें $250 मिलियन सीधे इंडिया-फोकस्ड फंड्स से निकले, जबकि बाकी रकम एशियन और ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट पोर्टफोलियो से आई। हालांकि, यह मार्च-अप्रैल 2026 के पीक आउटफ्लो से कम है।

सेक्टर पर असर और निवेशकों का मूड

पूंजी आवंटन के पैटर्न से पता चलता है कि निवेशक अब कई एसेट क्लास में ज़्यादा सतर्क हो गए हैं। एनर्जी फंड्स से रिकॉर्ड $3.2 बिलियन निकाले गए और कमोडिटी इक्विटी फंड्स भी लगातार आठ हफ़्ते से गिरावट झेल रहे हैं। गोल्ड फंड्स से $3.1 बिलियन की निकासी हुई, जो 14 हफ़्ते का हाई है। हालांकि, इंडस्ट्रियल सेक्टर फंड्स में $222 मिलियन का इनफ्लो देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक पूरी तरह से इक्विटी से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि ज़्यादा चुनिंदा होकर निवेश कर रहे हैं।

आगे क्या?

भारतीय निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि विदेशी बिकवाली जारी रहती है या नहीं। पिछले पैटर्न बताते हैं कि जब फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार बिकवाली करते हैं, तो बाज़ार में अस्थिरता बढ़ जाती है। यह देखना होगा कि क्या यह बिकवाली अगले हफ़्तों में भी जारी रहती है या डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनफ्लो इसे संभाल पाते हैं।

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