क्यों आई बाजार में मजबूती?
सोमवार को शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन अंत में बेंचमार्क सेंसेक्स ने ऊपरी स्तरों से बड़ी गिरावट को संभालते हुए 77 अंकों की बढ़त दर्ज की और 75,315 के स्तर पर बंद हुआ। यह रिकवरी खासतौर पर संस्थागत निवेशकों की खरीदारी की वजह से संभव हो पाई।
संस्थागत निवेशकों का पैसा
आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने बाजार में ₹2,814 करोड़ का निवेश किया, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,682 करोड़ डाले। इस तरह कुल मिलाकर ₹5,500 करोड़ से ज्यादा की इनफ्लो (inflow) खासतौर पर बड़ी कंपनियों (large-cap stocks) में आया, जिसने बाजार को सहारा दिया।
तेल की आग और रुपये की गिरावट
बाजार की शुरुआत में भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड $111 प्रति बैरल के पार निकल गया। इससे भारत में महंगाई बढ़ने और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। इसके अलावा, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.5 के करीब नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जिसने आयात लागत बढ़ा दी और निवेशकों की घबराहट को और बढ़ा दिया।
बड़ी कंपनियों को फायदा, छोटी कंपनियों को झटका
जहां संस्थागत खरीदारों की बदौलत लार्ज-कैप शेयरों ने मजबूती दिखाई, वहीं दूसरी ओर मिड-कैप इंडेक्स 0.2% और स्मॉल-कैप इंडेक्स 1.5% तक गिर गए। यह दिखाता है कि निवेशक छोटी और मझोली कंपनियों को लेकर सतर्क हैं, जो आर्थिक मंदी और करेंसी की गिरावट के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कुल मार्केट कैप (Market Cap) में करीब ₹2 लाख करोड़ की गिरावट आई और यह ₹458.4 लाख करोड़ रह गया। कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा की कीमतें और करेंसी की अस्थिरता निवेशकों के लिए मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है।