Food Giants के बल्ले-बल्ले: जब दुनिया भूख और कर्ज़ से जूझ रही है, ये कंपनियां कमा रहीं रिकॉर्ड मुनाफा

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Food Giants के बल्ले-बल्ले: जब दुनिया भूख और कर्ज़ से जूझ रही है, ये कंपनियां कमा रहीं रिकॉर्ड मुनाफा
Overview

एक नई एनालिसिस (analysis) से सामने आया है कि दुनिया भर की बड़ी फूड कंपनियां (Food Companies) वैश्विक उथल-पुथल और अपनी मार्केट पावर (market power) का फायदा उठाकर रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं। यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) और ट्रेड डिस्प्यूट्स (trade disputes) जैसी घटनाओं ने उन्हें कीमतें बढ़ाने का मौका दिया, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ और राष्ट्रीय कर्ज बढ़ा।

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कैसे वैश्विक संकटों से फूड कंपनियों की चांदी हो गई

यह कोई संयोग नहीं कि जब दुनिया भुखमरी, बढ़ते कर्ज और महंगाई से जूझ रही है, तब कुछ बड़ी फूड कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं। दशकों से बनी कमजोरियों और नीतियों के चलते आज की वैश्विक फूड सिस्टम (global food system) ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए तैयार है। यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) और नए ट्रेड डिस्प्यूट्स (trade disputes) जैसी घटनाओं ने इस नाजुक सिस्टम की पोल खोल दी है, जो आयात (import) पर बहुत ज्यादा निर्भर है और लोकल प्रोडक्शन (local production) को कमजोर कर चुका है।

खाद्य कंपनियां कमा रहीं रिकॉर्ड मुनाफा, उपभोक्ता परेशान

खाद बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे Nutrien और CF Industries की सेल्स (sales) पिछले क्वार्टर में लगभग 20% बढ़ गई हैं। इसकी वजह नाइट्रोजन फर्टिलाइजर (nitrogen fertilizer) की बढ़ी कीमतें हैं, जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की रुकावटों ने आग में घी का काम किया। Nutrien ने 2025 के लिए $6.05 बिलियन का एडजस्टेड EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) दर्ज किया है। यह तब है जब दुनिया भर के लगभग दो-तिहाई किसान 2026 में अपनी आय में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रॉसरी रिटेलर्स (grocery retailers) भी मार्केट की अस्थिरता से फायदा उठा रहे हैं। Kroger के Albertsons के साथ प्रस्तावित अधिग्रहण (acquisition) के चलते दोनों कंपनियों के वैल्यूएशन (valuation) में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया है। Kroger का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो बढ़कर 40 के पार चला गया है, जो सामान्य स्तर से बहुत ऊपर है और कुछ मामलों में 60 तक पहुंच रहा है। वहीं, Albertsons का P/E रेश्यो 11x से लेकर 40x या उससे अधिक तक है।

आर्थिक बोझ और नीतियों की जड़ें

यह प्रॉफिट बूस्ट (profit boost) तब आया है जब दुनिया गंभीर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रही है। 2025 में ग्लोबल फूड इंपोर्ट बिल (global food import bill) रिकॉर्ड $2.22 ट्रिलियन तक पहुंच गया। सबसे कम विकसित देशों (LDCs) और नेट फूड इंपोर्टिंग डेवलपिंग देशों (NFIDCs) के लिए तो यह स्थिति और भी खराब है, उनके ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। 1980s और 1990s के IMF और World Bank के इकोनॉमिक एडजस्टमेंट प्रोग्राम्स (economic adjustment programs) ने कई विकासशील देशों में लोकल फूड प्रोडक्शन को कमजोर किया, जिससे वे इंपोर्ट पर निर्भर हो गए और ग्लोबल कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो गए। मई 2023 में कुछ गरीब देशों में खाद्य पदार्थों की कीमतें 30% तक बढ़ी थीं, जो अब भी बहुत ऊंची बनी हुई हैं, जिससे लोगों की खरीदने की क्षमता घटी है और पोषण पर असर पड़ा है। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर (trade war) भी सप्लाई चेन को लगातार बदल रहा है। 2025 में नए तनावों के कारण साल के पहले आठ महीनों में चीन को अमेरिका के कृषि निर्यात (agricultural exports) में 54% की गिरावट आई।

उपभोक्ताओं के लिए सिस्टम क्यों फेल हो रहा है

IPES-Food की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा एग्री-फूड सिस्टम (agrifood system) दुनिया के अधिकांश लोगों के लिए काम नहीं कर रहा है। जबकि Nutrien और अन्य फर्टिलाइजर कंपनियों को सप्लाई में रुकावटों से रिकॉर्ड मुनाफा हो रहा है, किसानों की आय कम हो रही है और लागत बढ़ रही है। Nutrien का फॉरवर्ड P/E रेश्यो लगभग 14x है। वहीं, Kroger जैसे ग्रॉसरी दिग्गजों के P/E रेश्यो 40 या 60 से भी ऊपर हैं, जो उनकी ऐतिहासिक औसत से बहुत ज्यादा हैं। यह बताता है कि मार्केट का अनुमान है कि भविष्य में ग्रोथ बहुत ज्यादा होगी, या वैल्यूएशन (valuation) पिछले प्रदर्शन से अलग है। मुख्य समस्या पिछली नीतिगत फैसलों से बनी व्यापक निर्भरता है। सालों तक इकोनॉमिक एडजस्टमेंट प्रोग्राम्स के जरिए घरेलू खाद्य प्रणालियों को कमजोर करने के बाद, देश ग्लोबल झटकों से खुद को बचाने में असमर्थ हैं। इससे ADM, Cargill जैसी अनाज ट्रेडिंग (grain trading) और Nutrien जैसी फर्टिलाइजर (fertilizer) कंपनियों के पास कीमतों को नियंत्रित करने की जबरदस्त ताकत आ गई है, जैसे OPEC तेल की कीमतों को नियंत्रित करता है। इस मार्केट पावर (market power) से वे अपनी लागत में हुई वृद्धि से कहीं ज्यादा कीमतें बढ़ा पाते हैं। ट्रेड डिस्प्यूट्स (trade disputes) के कारण बायोडाइवर्सिटी (biodiversity) वाले इलाकों में प्रोडक्शन बढ़ाने का पर्यावरणीय प्रभाव मौजूदा सिस्टम की अस्थिरता को और दिखाता है। Kroger और Albertsons के विलय (merger) की योजना भी कंसॉलिडेशन (consolidation) के ट्रेंड को दर्शाती है, जिससे Competition कम हो सकता है और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें और बढ़ सकती हैं।

सिस्टम में बदलाव की मांग

IPES-Food की रिपोर्ट में "रेसिलिएंट सेल्फ-रिलायंस" (resilient self-reliance) की ओर बड़े बदलाव की जोरदार सिफारिश की गई है। इसका मतलब है मजबूत लोकल और रीजनल फूड सिस्टम (regional food systems) बनाना, अस्थिर ग्लोबल बाजारों पर निर्भरता कम करना, और पब्लिक फूड रिजर्व्स (public food reserves) जैसे तरीकों को फिर से लाना। कुछ विश्लेषक (analysts) इनपुट लागत (input costs) बढ़ने के कारण एग्री-साइकिल (agri-sector) को लेकर सतर्क हैं, लेकिन अन्य Nutrien जैसी कंपनियों को सकारात्मक रूप से देखते हैं। वे Nutrien को 'Buy' रेटिंग देते हुए तर्क देते हैं कि इसका इंटीग्रेटेड मॉडल (integrated model) और मजबूत 2025 EBITDA उभरते बाजारों में इसके ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) को कम करके आंकता है। Nutrien के सामान्य P/E और ग्रॉसरी रिटेलर्स के बहुत उच्च P/E के बीच का अंतर फूड इंडस्ट्री में जोखिम और अवसरों पर निवेशकों के अलग-अलग विचारों को दिखाता है। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि यह सिस्टम बड़े पैमाने पर फेल हो रहा है, जिससे कुछ को फायदा हो रहा है जबकि लाखों को नुकसान।

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