CRISIL: महंगाई की मार या मजबूती का संकेत? जानें क्या कहती है कंपनी की वैल्यूएशन!

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
CRISIL: महंगाई की मार या मजबूती का संकेत? जानें क्या कहती है कंपनी की वैल्यूएशन!
Overview

अप्रैल **2026** में घर का खाना बनाना **2%** महंगा हो गया है। CRISIL के लेटेस्ट फूड प्लेट कॉस्ट इंडिकेटर के अनुसार, टमाटर, तेल और LPG की कीमतों में उछाल के चलते थाली की लागत बढ़ी है। लेकिन, इन सबके बीच CRISIL की मार्केट वैल्यूएशन **35.8** के P/E रेश्यो के साथ मजबूत बनी हुई है।

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रसोई का बजट बिगड़ा, पर CRISIL की वैल्यूएशन मजबूत

CRISIL के ताज़ा फूड प्लेट कॉस्ट इंडिकेटर के मुताबिक, अप्रैल 2026 में थाली तैयार करने की लागत में पिछले साल के मुकाबले 2% का इजाफा हुआ है। टमाटर, वेजिटेबल ऑयल और LPG की कीमतों में आए उछाल ने इस बढ़ोतरी को हवा दी, जहां टमाटर 38% तक महंगा हुआ, वहीं तेल और LPG सिलेंडर 7% तक चढ़ गए।

गर्मी के मौसम में सप्लाई की दिक्कतों के चलते ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में भी 2% की बढ़ोतरी देखी गई, जिसका असर नॉन-वेज थाली पर भी पड़ा। हालांकि, प्याज़ (YoY 16% नीचे), आलू (YoY 14% नीचे) और दालों (YoY 4% नीचे) की कीमतों में आई गिरावट ने कुछ हद तक राहत दी। यह रिपोर्ट CRISIL डायरेक्टर पुशन शर्मा ने तैयार की है, जो घरेलू खर्च पर इन कीमतों के असर का आकलन करती है।

CRISIL की वैल्यूएशन का दम

जहां एक ओर खाने-पीने की चीज़ों की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर CRISIL की मार्केट वैल्यूएशन काफी दमदार बनी हुई है। मई 2026 तक, कंपनी का TTM (Trailing Twelve Months) P/E रेश्यो 35.8 था। यह वैल्यूएशन CRISIL के एनालिटिकल सर्विसेज और क्रेडिट रेटिंग बिजनेस में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाती है। अपनी ग्लोबल एफिलिएशन S&P Global के चलते, CRISIL अपने प्रतिद्वंद्वियों जैसे ICRA (P/E 28.45) और CARE Ratings (P/E 29.0) से प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है।

मार्केट का माहौल और संभावित चुनौतियां

अप्रैल 2026 में इंडियन इक्विटी मार्केट में 15% से अधिक की तेजी देखी गई, जिससे CRISIL जैसी कंपनियों की सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। CRISIL, SEBI के तहत ICRA, CARE Ratings और India Ratings and Research जैसी कंपनियों के साथ क्रेडिट रेटिंग सेक्टर में काम करती है।

हालांकि, CRISIL के सामने कुछ संभावित चुनौतियां भी हैं। लगातार बनी हुई इन्फ्लेशन (महंगाई) क्लाइंट्स के ऑपरेटिंग कॉस्ट को बढ़ा सकती है, जिससे वे एनालिटिकल सर्विसेज पर खर्च कम कर सकते हैं। ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन या जियोपॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी (जैसे US-ईरान टेंशन से तेल कीमतों पर असर) भी मार्केट एक्टिविटी को धीमा कर सकती है और नई डेट इश्यूएंसेज की मांग घटा सकती है। CRISIL का फॉरवर्ड P/E 40.77 है, जो कैपिटल मार्केट्स इंडस्ट्री के मीडियन 16.74 से काफी ऊपर है।

भविष्य की राह

भारत की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च एजेंसी होने के नाते, CRISIL इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ने और भरोसेमंद फाइनेंशियल इनसाइट्स की जरूरत से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। कंपनी पर पिछले पांच सालों से कोई डेट नहीं है और रेवेन्यू ग्रोथ भी मजबूत रही है, जो इसकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी का समर्थन करती है। इन्फ्लेशन और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच, CRISIL की एनालिटिकल सर्विसेज की मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जो इसकी वैल्यूएशन को सपोर्ट करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.