शिक्षा में बेटियों का दबदबा: 2.23 करोड़ पहुंचीं हायर एजुकेशन में, STEM में भी शानदार बढ़त

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
शिक्षा में बेटियों का दबदबा: 2.23 करोड़ पहुंचीं हायर एजुकेशन में, STEM में भी शानदार बढ़त

भारत में उच्च शिक्षा में बेटियों का दाखिला 2023-24 में **2.23 करोड़** पार कर गया है। ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) **31.2%** पर पहुंच गया है। NEP 2020 और PM-USHA जैसी पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

Detailed Coverage

महिला शिक्षा में नया कीर्तिमान!

साल 2023-24 में भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन कराने वाली महिलाओं की संख्या 2.23 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। यह 2021-22 के 2.06 करोड़ के आंकड़े से एक महत्वपूर्ण उछाल दिखाता है। वहीं, ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER), जो किसी आयु वर्ग की कुल जनसंख्या के मुकाबले उस स्तर पर नामांकित छात्रों का अनुपात मापता है, महिलाओं के लिए बढ़कर 31.2% हो गया है, जो तीन साल पहले 28.5% था।

NEP 2020 और PM-USHA का बड़ा असर

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह तरक्की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP 2020) के तहत किए गए बदलावों का नतीजा है। इस वृद्धि में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) का अहम योगदान है। जून 2023 में इस योजना के लिए ₹12,926.10 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। यह योजना खासकर सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और पहुंच को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा में जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) 1 से ऊपर चला गया है। इसका मतलब है कि अब फॉर्मल हायर एजुकेशन सिस्टम में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी ज़्यादा हो रही है। यह भारतीय कार्यबल के लॉन्ग-टर्म डेमोग्राफिक्स में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है, खासकर टेक्निकल और प्रोफेशनल सेक्टर्स में।

STEM में भी बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी

साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब STEM से जुड़े कोर्सेज में कुल नामांकन का लगभग 43% महिलाएं हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी महिलाओं के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने के उपाय किए गए हैं, जिससे इन संस्थानों में उनकी हिस्सेदारी 10% से बढ़कर 20% से ज़्यादा हो गई है।

भविष्य की राह

निवेशकों और विश्लेषकों के लिए, PM-USHA के तहत फंड के उपयोग की दर और टेक्निकल फील्ड्स में महिला ग्रेजुएट्स के लॉन्ग-टर्म एम्प्लॉयमेंट डेटा पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। जैसे-जैसे कुशल महिला प्रतिभा की आपूर्ति बढ़ेगी, अर्थव्यवस्था के लिए इस वर्कफोर्स को हाई-वैल्यू सेक्टर्स में एकीकृत करने की क्षमता मानव पूंजी उत्पादकता और कॉरपोरेट टैलेंट सोर्सिंग का एक प्रमुख कारक बनेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.