फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की गवर्नर लिसा कुक ने केंद्रीय बैंकरों के सामने एक बड़ी चुनौती रखी है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अमेरिकी लेबर मार्केट (Labor Market) को मौलिक रूप से बदल रहा है, जिससे पारंपरिक मनी पॉलिसी (Monetary Policy) की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
कुक ने बताया कि AI की वजह से प्रोडक्टिविटी (Productivity) बढ़ सकती है, भले ही बेरोजगारी में इजाफा हो। ऐसे में, अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट घटाता है ताकि बेरोजगारी कम हो, तो इससे इन्फ्लेशनरी दबाव (Inflationary Pressure) बढ़ सकता है। जनवरी 2026 तक, बेरोजगारी दर 4.3% पर थी, और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के अनुसार इन्फ्लेशन 2.4% था। यह फेडरल रिजर्व के लिए एक नाजुक संतुलन बनाने वाली स्थिति है।
AI, इंटरेस्ट रेट की न्यूट्रल रेट (Neutral Rate) को लेकर भी अनिश्चितता पैदा कर रहा है। गवर्नर कुक ने इशारा किया कि AI में भारी निवेश अल्पावधि में इस रेट को बढ़ा सकता है, जिसके लिए सख्त मनी पॉलिसी की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में, अगर AI का फायदा कुछ खास लोगों तक ही सीमित रहा और आय असमानता बढ़ी, तो न्यूट्रल रेट कम भी हो सकता है।
AI का लेबर मार्केट पर असर एक जैसा नहीं है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, कंप्यूटर सिस्टम डिजाइन जैसे AI-संवेदनशील क्षेत्रों में नौकरियों में 5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, कुछ नौकरियां AI की मदद से और बेहतर हो सकती हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी और कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है। कुछ विश्लेषणों का अनुमान है कि AI के कारण कुल रोजगार पर असर मामूली और अस्थायी हो सकता है। AI-प्रभावित क्षेत्रों में वेतन राष्ट्रीय औसत से ज्यादा बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि AI से होने वाली स्ट्रक्चरल बेरोजगारी (Structural Unemployment) से निपटने में पारंपरिक मनी पॉलिसी अप्रभावी साबित हो सकती है। अगर AI नौकरियों को खत्म करता है लेकिन इकोनॉमी में स्लैक (Slack) कम नहीं होता, तो इंटरेस्ट रेट घटाने से इन्फ्लेशन भड़क सकता है। यह बेरोजगारी और प्राइस स्टेबिलिटी (Price Stability) के बीच एक कड़ा ट्रेड-ऑफ (Trade-off) है। इसके लिए शिक्षा और वर्कफोर्स री-ट्रेनिंग (Workforce Retraining) जैसे गैर-मनी पॉलिसी उपायों की भी जरूरत पड़ सकती है।
गवर्नर कुक की बातों से साफ है कि आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए अनिश्चितता का दौर बढ़ गया है। AI एक परिवर्तनकारी शक्ति साबित हो सकता है, जो लेबर मार्केट और मनी पॉलिसी की प्रभावशीलता में अभूतपूर्व गतिशीलता लाएगा। फेडरल रिजर्व इन प्रभावों पर गहराई से शोध कर रहा है।