महंगाई का 'बवाल' और ग्रोथ की चिंता
फेडरल रिजर्व (Fed) अपनी आने वाली FOMC मीटिंग में अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) को अपरिवर्तित रखने का फैसला कर सकता है। मार्केट में यही उम्मीद जताई जा रही है और 3.50%-3.75% के मौजूदा टारगेट रेंज में कोई बदलाव नहीं होगा। यह निर्णय ऐसे समय में आ रहा है जब अमेरिकी इकोनॉमी (US Economy) कई जटिल आर्थिक परिदृश्यों से गुजर रही है।
कच्चे तेल के दाम चढ़े, बढ़ी महंगाई की आफत
इस फैसले की एक बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं, जो ईरान संघर्ष के कारण और भड़क गई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (Brent Crude Oil Futures) इस समय लगभग $108-$110 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। यह सप्लाई-साइड इन्फ्लेशन (Supply-side Inflation) फेड के दोहरे लक्ष्यों - प्राइस स्टेबिलिटी (Price Stability) और मैक्सिमम एम्प्लॉयमेंट (Maximum Employment) - के बीच एक मुश्किल संतुलन बनाने पर मजबूर कर रही है। अमेरिका में लेबर मार्केट (Labor Market) अभी भी मजबूत बना हुआ है, जहाँ मार्च 2026 में बेरोजगारी दर 4.3% थी, और महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
दुनिया भर के सेंट्रल बैंक भी चिंतित
फेड की यह स्थिति दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों की चुनौतियों से मिलती-जुलती है। बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) ने अप्रैल में अपनी पॉलिसी रेट को 0.75% पर स्थिर रखा, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों के कारण FY2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 2.8% कर दिया। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (European Central Bank) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) भी उच्च महंगाई से जूझ रहे हैं। फेडरल रिजर्व ने अतीत में भी तेल की कीमतों के झटकों का सामना किया है। 1970 के दशक में, सप्लाई शॉक (Supply Shocks) के कारण महंगाई बढ़ी थी, और फेड की प्रतिक्रिया ने कीमतों पर नियंत्रण तो पाया, लेकिन इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) को भी जन्म दिया। वर्तमान तनाव इन पिछली घटनाओं की याद दिलाते हैं, खासकर तब जब वैश्विक ऊर्जा का लगभग 20% हिस्सा जिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरता है, वह तनाव में है।
लीडरशिप चेंज से बढ़ा अनिश्चितता का माहौल
इन सबके बीच, फेडरल रिजर्व में लीडरशिप ट्रांजीशन (Leadership Transition) का मुद्दा एक और जोखिम पैदा कर रहा है। चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, और उनकी जगह प्रेसिडेंट ट्रम्प द्वारा नॉमिनेट किए गए केविन वॉर्श (Kevin Warsh) संभावित रूप से नए चेयरमैन बन सकते हैं। वॉर्श ने मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) पर ज्यादा फोकस, छोटे बैलेंस शीट (Balance Sheet) और फॉरवर्ड गाइडेंस (Forward Guidance) को खत्म करने जैसे बदलावों का संकेत दिया है। हालांकि वॉर्श ने प्राइस स्टेबिलिटी और सेंट्रल बैंक की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन फॉरवर्ड गाइडेंस से हटने से मार्केट में अस्थिरता बढ़ सकती है।
आगे क्या?
जैसे-जैसे चेयरमैन पॉवेल का कार्यकाल खत्म हो रहा है, बाज़ार उनकी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस से इकोनॉमिक आउटलुक (Economic Outlook) और भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) पर अहम जानकारी की उम्मीद कर रहे हैं। केविन वॉर्श की नई फेड चेयरमैन के तौर पर पुष्टि लगभग तय मानी जा रही है, जो फेडरल रिजर्व के कामकाज के तरीके में बड़े बदलाव का संकेत दे सकती है। यह बदलाव ऐसे नाजुक समय में हो रहा है, जब फेड की सफलता महंगाई को काबू करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के बीच संतुलन साधने पर निर्भर करेगी।
