भू-राजनीतिक संकट और बढ़ती महंगाई का दोहरा झटका
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। Elara Securities की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Conflict) और लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation) के कारण फेडरल रिजर्व को अपनी आसान मौद्रिक नीति (Easing Policy) से पीछे हटना पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में आग, महंगाई पर असर
हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में बड़ा झटका लगा है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसने पहले से मौजूद महंगाई को और बढ़ा दिया है। मार्च 2026 में पेट्रोल की कीमतों में 18.9% और फ्यूल ऑयल में 44.2% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर खाने-पीने की चीजों और प्लास्टिक पर भी पड़ रहा है, क्योंकि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ गई है। इन सप्लाई शॉक, टैरिफ और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते मार्च 2026 में हेडलाइन इन्फ्लेशन 3.3% पर पहुंच गया। Elara Securities ने Q4/2026 के लिए US कोर पीसीई इन्फ्लेशन (Core PCE Inflation) का अनुमान 2.6% से बढ़ाकर 2.9% कर दिया है, जबकि J.P. Morgan का अनुमान 2.7% है। ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई अभी भी फेड के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है।
फेड का फोकस: महंगाई या लेबर मार्केट?
Elara Securities के अपडेटेड व्यू के अनुसार, अगर महंगाई इसी तरह ऊंची बनी रहती है, तो फेडरल रिजर्व अपनी नरमी की नीति को छोड़कर सख्त (Tightening) नीति अपना सकता है। यह 2026 में कई बार ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) की पिछली उम्मीदों से एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, लेबर मार्केट (Labor Market) अभी भी मजबूत दिख रहा है, लेकिन फेड का मुख्य ध्यान अब महंगाई को काबू में करने पर है।
अन्य एनालिस्ट भी इस बात से सहमत हैं। US Bank ने मई 2026 की शुरुआत में कहा था कि फेड ने ब्याज दरों को 3.50-3.75% पर बनाए रखा है, और वह महंगाई के जोखिम, धीमी हायरिंग और मध्य पूर्व की अनिश्चितता का आकलन कर रहा है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सितंबर तक बंद रहता है, तो दिसंबर 2026 में 25 बेसिस पॉइंट (Basis Point) की ब्याज दर वृद्धि (20% संभावना) हो सकती है। आने वाले 2026 FOMC वोटिंग लाइनअप में हैमैक, लोगन, कशकारी और पॉलसन जैसे अधिक 'हॉकिश' (Hawkish) सदस्यों के शामिल होने से भी यह दिशा बदल सकती है। फेड अधिकारियों लोगन, हैमैक और कशकारी ने अप्रैल 29 की बैठक में ब्याज दर वृद्धि के प्रति खुलेपन का संकेत दिया था।
बाजार भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहा है। बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते मई 2026 के मध्य में 10-साल की ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yield) 4.599% के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई।
मुख्य जोखिम और अनिश्चितताएं
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष एक बड़ा जोखिम है, जो ऊर्जा की कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकता है और महंगाई को मौजूदा अनुमानों से भी बदतर बना सकता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा, तो तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे ऊर्जा लागत और महंगाई बढ़ेगी और फेड को और ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। टैरिफ और संघर्ष से सप्लाई चेन में आई बाधाएं भी उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा रही हैं। रियल एस्टेट जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर संभावित दर वृद्धि से प्रभावित हो सकते हैं।
एक संभावित नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के तहत नीति की दिशा पर भी अनिश्चितता है, जिन्होंने 'रेजीम चेंज' (Regime Change) का सुझाव दिया है, जिससे अल्पकालिक बाजार अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसके अलावा, ऐसे कानूनों पर चर्चा जो फेड के रोजगार जनादेश (Employment Mandate) को समाप्त कर सकते हैं, हॉकिश नीति की राजनीतिक लागत को कम कर सकते हैं। मई 15, 2026 तक 27.071 के आसपास S&P 500 का P/E रेश्यो (P/E Ratio) यह दर्शाता है कि बाजार अत्यधिक मूल्यांकित (Highly Valued) है और आक्रामक सख्ती या आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील है।
बाजार का आउटलुक और सेक्टर पर असर
Elara Securities 2026 में मौद्रिक नीति के लिए एक कठिन वर्ष की उम्मीद कर रही है, जिसमें पहले की अनुमानित कटौतियों के बजाय अब दर होल्ड (Rate Hold) होने की अधिक संभावना है। एक प्रमुख ब्रोकरेज की यह शिफ्ट मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों के बीच महंगाई नियंत्रण के महत्व को व्यापक बाजार की स्वीकृति का संकेत देती है। जबकि Morgan Stanley को उम्मीद है कि फेड 2026 के अंत तक दरों को बनाए रखेगा, Goldman Sachs का अनुमान है कि कोर पीसीई इन्फ्लेशन साल के अंत तक 2.2% तक गिर जाएगा, जो एक हल्की महंगाई की स्थिति का सुझाव देता है। बाजार की प्रतिक्रियाएं, जिनमें ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और उच्च P/E रेश्यो शामिल हैं, इन बदलावों के प्रति संवेदनशीलता दिखाती हैं, जो नीतिगत त्रुटियों या भू-राजनीतिक घटनाओं से बाधित हो सकती हैं। उच्च तेल कीमतों से प्रेरित ऊर्जा सेक्टर और रक्षा खर्च से संभावित रूप से लाभान्वित होने वाले इंडस्ट्रियल्स (Industrials) सेक्टर में मजबूती दिख सकती है। इसके विपरीत, रियल एस्टेट जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टरों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।