FPIs का भारतीय बाज़ारों से मोहभंग! लगातार चौथे हफ़्फ़े ₹13,740 करोड़ की बिकवाली

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FPIs का भारतीय बाज़ारों से मोहभंग! लगातार चौथे हफ़्फ़े ₹13,740 करोड़ की बिकवाली
Overview

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) लगातार चौथे हफ़्फ़े भारतीय बाज़ारों से पैसे निकालते रहे। 15 मई, 2026 को समाप्त हुए हफ़्फ़े में कुल **₹13,740 करोड़** से ज़्यादा की बिकवाली हुई। ग्लोबल अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मज़बूत होते अमेरिकी डॉलर के चलते यह पैसा निकाला गया, लेकिन डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स ने बाज़ार को संभाला।

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 15 मई, 2026 को समाप्त हुए हफ़्फ़े में भारतीय बाज़ारों से ₹13,740.89 करोड़ की रकम निकाली। यह लगातार चौथी हफ़्फ़े से जारी बिकवाली का संकेत है, जो विदेशी निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है।

रोज़ाना की ट्रेडिंग एक्टिविटी (Daily Trading Activity)

बिकवाली का दबाव हफ़्फ़े की शुरुआत से ही था। सोमवार, 11 मई को FPIs ने ₹1,131.77 करोड़ निकाले। मंगलवार को सबसे बड़ी निकासी हुई, जिसमें ₹7,545.99 करोड़ बाज़ार से बाहर चले गए। इसमें से अकेले इक्विटी (शेयर) सेगमेंट से ₹7,822.29 करोड़ की भारी निकासी हुई। बुधवार को बाज़ार में थोड़ी तेज़ी आई और ₹346.37 करोड़ का नेट इनफ्लो (पैसे आए) देखा गया। हालांकि, गुरुवार को फिर से ₹3,579.50 करोड़ का बड़ा आउटफ्लो दर्ज हुआ। शुक्रवार को हफ़्फ़े का अंत कुल ₹1,830.00 करोड़ के आउटफ्लो के साथ हुआ, जबकि इक्विटी में ₹1,111.53 करोड़ का नेट इनफ्लो देखा गया। पूरे हफ़्फ़े में इक्विटी से कुल ₹12,817.11 करोड़ की निकासी हुई।

विदेशी आउटफ्लो के पीछे के कारण

विश्लेषकों के मुताबिक, FPIs के इस लगातार पैसे निकालने के पीछे कई वजहें हैं। कमज़ोर पड़ता रुपया (Weakening Rupee), कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Crude Oil Prices) और ग्लोबल मार्केट्स में जोखिम भरी एसेट्स (Riskier Assets) के प्रति आम सतर्कता ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Economies) में निवेशकों की रुचि कम कर दी है। Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा, "इस साल कुल FPI बिकवाली पिछले साल की कुल बिकवाली से ज़्यादा हो चुकी है।" उन्होंने यह भी बताया कि AI (Artificial Intelligence) पर केंद्रित कंपनियों की ओर ग्लोबल कैपिटल शिफ्ट हो रहा है, जबकि भारत जैसे 'AI लैगार्ड्स' (AI में पिछड़ने वाले देश) से पैसा निकल रहा है।

Morningstar Investment Research India के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ की अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख बाधाएं हैं। मज़बूत होता अमेरिकी डॉलर (Stronger US Dollar) और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (Rising US Bond Yields) ने सुरक्षित निवेश (Safer Investments) को ज़्यादा आकर्षक बना दिया है, जिससे भारत जैसे बाज़ारों से पैसा दूर जा रहा है।

डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स की अहम भूमिका

विदेशी निवेशकों द्वारा की गई इस भारी बिकवाली के बावजूद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने बाज़ार को संभाले रखा। अनुमान है कि DIIs ने हफ़्फ़े में लगभग ₹18,524-18,525 करोड़ का नेट इनफ्लो किया। इस मज़बूत डोमेस्टिक खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के एक बड़े हिस्से को अवशोषित कर लिया, जिससे प्रमुख इंडेक्स (Benchmark Indices) को स्थिर रखने में मदद मिली।

आगे चलकर, बाज़ार की नज़रें अमेरिकी-ईरान तनाव, तेल की कीमतों की दिशा और आने वाली तिमाही की कॉर्पोरेट आय (Quarterly Corporate Earnings) पर रहेंगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लोज़ को स्थिर करने और रुपये को सहारा देने के लिए FCNR डॉलर डिपोजिट लॉन्च करने या FPIs के लिए टैक्स छूट जैसे नीतिगत हस्तक्षेप (Policy Interventions) ज़रूरी हो सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.