FPIs की वापसी: जुलाई में ₹37,000 करोड़ का भारी निवेश, 4 महीने की बिकवाली का सिलसिला थमा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FPIs की वापसी: जुलाई में ₹37,000 करोड़ का भारी निवेश, 4 महीने की बिकवाली का सिलसिला थमा

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई में भारतीय बाजारों का रुख किया है। 4 महीने की लगातार बिकवाली के बाद, FPIs ने इस महीने **$4.4 बिलियन** (लगभग **₹37,000 करोड़**) का शुद्ध निवेश किया है। यह साल 2026 में किसी एक महीने में हुआ सबसे बड़ा इनफ्लो है।

Detailed Coverage

जुलाई में FPIs की जोरदार वापसी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई के महीने में भारतीय बाजारों में $4.4 बिलियन (लगभग ₹41,796 करोड़) का शुद्ध निवेश किया है। 24 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, यह साल 2026 में किसी भी महीने में हुआ सबसे बड़ा इनफ्लो है। इस निवेश ने मार्च से जून तक चले लगातार बिकवाली के सिलसिले को आखिरकार रोक दिया है।

प्राइमरी मार्केट और डेट सेगमेंट में दिलचस्पी

इस वापसी की बड़ी वजह प्राइमरी मार्केट में FPIs की सक्रियता रही। खासकर, SBI Funds के IPO में विदेशी संस्थाओं ने एंकर और QIP दोनों श्रेणियों में भारी दिलचस्पी दिखाई, जिसने पूंजी प्रवाह को बढ़ाया। इक्विटी के अलावा, डेट (Debt) सेगमेंट भी विदेशी पूंजी के लिए एक मजबूत सहारा साबित हुआ है। सरकारी टैक्स नीतियों में हुए बदलावों के बाद यह सेगमेंट अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो गया है, और इस साल डेट सेगमेंट में कुल इनफ्लो $9.5 बिलियन तक पहुंच गया है।

बाजार का संदर्भ और भविष्य का अनुमान

हालांकि जुलाई के आंकड़े सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, लेकिन साल-दर-तारीख (Year-to-date) के समग्र आंकड़े साल की शुरुआत की अस्थिरता को दर्शाते हैं। मार्च से जून के बीच, भारत ने $27.8 बिलियन से अधिक की इक्विटी बिकवाली देखी थी, जिसके कारण साल-दर-तारीख इक्विटी प्रवाह $27.7 बिलियन के शुद्ध घाटे में चला गया था। जुलाई की रिकवरी के बावजूद, सभी एसेट क्लास में कुल विदेशी प्रवाह साल के लिए अब तक $18.4 बिलियन कम है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय संपत्तियों में फिर से रुचि दिखाता है, लेकिन एक स्थायी प्रवृत्ति कई बाहरी और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। वैश्विक मैक्रोइकॉनोमिक स्थिरता FPIs के व्यवहार को प्रभावित करती रहेगी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों या भू-राजनीतिक स्थितियों में कोई भी अचानक बदलाव सेंटिमेंट को बदल सकता है। घरेलू स्तर पर, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और भविष्य की कॉर्पोरेट आय का स्वास्थ्य दीर्घकालिक विदेशी पूंजी प्रतिबद्धता के लिए निर्णायक कारक बने रहेंगे। निवेशक आगे FPIs की चाल को प्रभावित करने वाले ट्रिगर के रूप में आगामी IPOs की मात्रा और विदेशी निवेश सीमा और कराधान पर सरकारी नीति में बदलावों की निगरानी कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.