विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने महीनों की बिकवाली का सिलसिला तोड़ते हुए जुलाई के पहले दस दिनों में भारतीय बाजारों में **$2.59 बिलियन** (लगभग **₹21,500 करोड़**) का भारी निवेश किया है। इसमें से **$1.6 बिलियन** इक्विटीज़ में लगाए गए हैं, जो भारतीय शेयरों में बढ़ते भरोसे का संकेत है।
FPIs का मार्केट में फिर से जोश
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई महीने में भारतीय फाइनेंशियल मार्केट्स (Financial Markets) में धमाकेदार वापसी की है। महीनों से चल रही बिकवाली को रोकते हुए, जुलाई के पहले 10 दिनों में कुल $2.59 बिलियन का इनफ्लो (inflow) हुआ है, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹24,662 करोड़ बनता है। यह बड़ी बड़ा बदलाव अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रणनीति में आया है, जिन्होंने पहले ऊंची वैल्यूएशन (valuations) और ग्लोबल इकोनॉमी (global economy) की अनिश्चितताओं के कारण बिकवाली की थी।
इक्विटी में निवेश का बढ़ता रुझान
हालांकि जून में FPIs ने भारतीय डेट मार्केट (debt market) में भी दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन जुलाई में उनका फोकस अब स्टॉक मार्केट (stock market) की ओर बढ़ गया है। इक्विटी (equity) में $1.6 बिलियन का निवेश हुआ, जो इस अवधि में देश में आए कुल पैसों का 60% से ज्यादा है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि मार्च से मई के बीच FPIs ने $24 बिलियन से अधिक की बिकवाली की थी। जुलाई के शुरुआती 10 ट्रेडिंग सेशन में लगातार विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी देखी गई, जिसमें 9 जुलाई को अकेले $978 मिलियन का एक दिन का इनफ्लो शामिल था।
फाइनेंशियल सर्विसेज बनीं पहली पसंद
सेक्टर-स्पेसिफिक (sector-specific) डेटा के अनुसार, फाइनेंशियल सर्विसेज (financial services) इस नए निवेश के लिए मुख्य आकर्षण साबित हो रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे साउथ कोरिया (South Korea) और ताइवान (Taiwan) जैसे सेमीकंडक्टर-हेवी मार्केट्स (semiconductor-heavy markets) में वोलैटिलिटी (volatility) बढ़ रही है, ग्लोबल कैपिटल (global capital) का रुख भारतीय फाइनेंशियल स्टॉक्स की ओर मुड़ रहा है। इन्हें अक्सर देश के ओवरऑल इकोनॉमिक ग्रोथ (economic growth) के प्रॉक्सी (proxy) के तौर पर देखा जाता है। इसके साथ ही, स्थिर रुपया (rupee) और सुधरते डोमेस्टिक इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (domestic economic indicators) ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद की है, जो साल की पहली छमाही में हुई मार्केट करेक्शंस (market corrections) के कारण कम हो गया था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
FPIs की बिकवाली के रुकने और निवेश शुरू होने को लिक्विडिटी (liquidity) और मार्केट सेंटिमेंट (market sentiment) का एक अहम संकेत माना जा रहा है। यह हालिया खरीदारी विदेशी भागीदारी में स्थिरता का संकेत देती है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या यह इनफ्लो पूरे महीने जारी रहेगा। निवेशकों को ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) के ट्रेंड्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह अक्सर FPIs के निवेश की दिशा तय करते हैं। साथ ही, आने वाली डोमेस्टिक कॉर्पोरेट अर्निंग्स (corporate earnings) यह तय करेंगी कि मौजूदा स्टॉक वैल्यूएशन्स (stock valuations) इन ग्लोबल फंड्स के लिए कितनी आकर्षक बनी रहती हैं। हालांकि, मौजूदा रुझान पॉजिटिव है, यह जून में FPIs द्वारा $5.1 बिलियन की बिकवाली के बाद आया है, जो दिखाता है कि ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा के आधार पर सेंटिमेंट कितनी जल्दी बदल सकता है।
