FIIs और DIIs ने की ₹4,624 करोड़ की खरीदारी, गिरे Nifty और Sensex

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AuthorAditya Rao|Published at:
FIIs और DIIs ने की ₹4,624 करोड़ की खरीदारी, गिरे Nifty और Sensex

14 जुलाई को विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने मिलकर भारतीय शेयरों में ₹4,624 करोड़ का निवेश किया। यह खरीदारी तब हुई जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मुनाफावसूली के कारण बेंचमार्क Nifty और Sensex इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए।

संस्थागत निवेशकों ने की जोरदार खरीदारी

14 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ारों में संस्थागत निवेशकों की ओर से ज़बरदस्त खरीदारी देखी गई, भले ही पूरे दिन बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बना रहा। स्टॉक एक्सचेंजों से मिले अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹2,603.72 करोड़ के शेयर नेट खरीदे। यह जून के बाद एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जब संस्थागत बिकवाली लगभग ₹49,000 करोड़ तक पहुँच गई थी।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाज़ार को सहारा देना जारी रखा और कैश मार्केट में ₹2,019.68 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। दोनों संस्थागत श्रेणियों से कुल ₹4,623.40 करोड़ का इनफ्लो यह दर्शाता है कि बड़े निवेशक बाज़ार में गिरावट का फायदा उठाकर पोजीशन बना रहे हैं, जो इक्विटी के लिए एक सपोर्ट लेवल प्रदान कर सकता है।

तेल की कीमतों से बाज़ार पर दबाव

संस्थागत भागीदारी के बावजूद, बाज़ार का सेंटिमेंट सतर्क बना रहा। Nifty 50 इंडेक्स 0.66% गिरकर 24,052 पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 77,054 पर रहा। प्रमुख सूचकांकों पर गिरावट का दबाव मुख्य रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के कारण था, जो $85 प्रति बैरल के पार निकल गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनती हैं क्योंकि यह आयात लागत और महंगाई को बढ़ा सकती हैं।

इसके अलावा, Nifty स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.01% और Nifty मिडकैप 100 इंडेक्स 0.44% टूट गया। मुनाफावसूली का ट्रेंड रियलिटी, PSU बैंक्स और ऑटो जैसे सेक्टरों में सबसे ज़्यादा दिखा, जो इंडेक्स प्रदर्शन पर भारी पड़े।

सेक्टर-वार प्रदर्शन और निवेशक क्या देखें?

कुल मिलाकर गिरावट के बावजूद, कुछ सेक्टरों में निवेशकों ने चुनिंदा रुचि दिखाई। फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर, मेटल इंडेक्स के साथ, बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रहे। निवेशकों का ऐसे डिफेंसिव शेयरों की ओर रुझान तब देखा जाता है जब वे मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक को लेकर चिंतित होते हैं और स्थिरता चाहते हैं।

निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संस्थागत खरीदारी का ट्रेंड आने वाले सत्रों में जारी रहता है। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो बाज़ार में अस्थिरता जारी रह सकती है, जिससे ऑटो और रियलिटी जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशक भविष्य के एक्सचेंज डेटा पर भी नज़र रख सकते हैं कि क्या हालिया FII खरीदारी आत्मविश्वास की स्थायी वापसी का संकेत है या यह बाज़ार में गिरावट पर एक छोटी अवधि की रणनीतिक चाल है।

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