FIIs ने बेचे ₹3,062 करोड़ के शेयर, भारतीय बाजार लगभग सपाट बंद

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FIIs ने बेचे ₹3,062 करोड़ के शेयर, भारतीय बाजार लगभग सपाट बंद

13 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में ₹3,062 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹2,172 करोड़ का सहारा दिया। बाजार लगभग सपाट बंद हुआ, निफ्टी 24,211 पर रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सतर्क दिखे, हालांकि टेक्नोलॉजी शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया।

बाजार में दिखी मिली-जुली तस्वीर

13 जुलाई को भारतीय शेयर बाजारों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू खरीदारी ने विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को संतुलित किया। BSE सेंसेक्स 47.01 अंकों की बढ़त के साथ 77,616.40 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 4.10 अंकों का मामूली इजाफा हुआ और यह 24,211 पर बंद हुआ। प्रमुख सूचकांकों में स्पष्ट दिशा की कमी व्यापक बाजार में भी दिखी, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में कोई खास बढ़त या गिरावट दर्ज नहीं की गई।

संस्थागत गतिविधि में दिखी बड़ी भिन्नता

इस सत्र में संस्थागत निवेशकों की रणनीति में स्पष्ट विभाजन देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने दिन के दौरान ₹3,062 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने ₹10,387 करोड़ की खरीदारी के मुकाबले ₹13,449 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,172 करोड़ की शुद्ध खरीदारी दर्ज की, जिसमें उनकी कुल खरीद ₹17,393 करोड़ रही, जिससे बाजार को सहारा मिला।

सेक्टर लीडर्स और पिछड़ने वाले स्टॉक्स

निफ्टी में मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों ने तेजी का दम भरा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 5.4% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जिसे HCLTech, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसे अन्य सेक्टर के साथियों से भी सकारात्मक समर्थन मिला। बजाज ऑटो भी दिन के टॉप गेनर्स में शामिल रहा। दूसरी ओर, औद्योगिक और विनिर्माण (manufacturing) शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। ग्रासिम इंडस्ट्रीज 2% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा लुढ़कने वाला स्टॉक रहा, जबकि टाटा स्टील, नेस्ले इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन और आयशर मोटर्स के शेयर मूल्यों में भी गिरावट आई।

बाजार की भावना को प्रभावित करने वाले कारक

बाजार में यह सतर्कता कई दबावों के कारण थी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की भावना पर लगातार भारी पड़ रही हैं, क्योंकि ये मुद्रास्फीति और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता ने अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है, जिससे कई बाजार प्रतिभागी 'प्रतीक्षा करें और देखें' (wait-and-watch) का दृष्टिकोण अपना रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान अस्थिरता सीमित है, लेकिन निवेशक घरेलू विकास की कहानियों और वैश्विक मैक्रो हेडविंड्स के बीच संतुलन बनाते हुए मुनाफावसूली (profit-taking) कर रहे हैं।

निवेशक अब आगामी तिमाही नतीजों (quarterly earnings season) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कॉर्पोरेट लाभप्रदता रिपोर्ट और भविष्य की मांग पर प्रबंधन की टिप्पणी, बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी। कंपनी के नतीजों के अलावा, निवेशक कच्चे तेल की कीमतों के रुझान और विदेशी फंड फ्लो पैटर्न में किसी भी बदलाव पर नजर रखेंगे, जो अल्पावधि बाजार स्थिरता के लिए केंद्रीय बने रहेंगे।

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