23 जुलाई को विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹2,999 करोड़ निकाल लिए, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,947 करोड़ की खरीदारी की। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक दबाव के साथ, इस बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों को लगातार चौथे दिन नीचे धकेल दिया। निवेशक यह ट्रैक कर रहे हैं कि सपोर्ट लेवल्स कैसे टिकते हैं, क्योंकि ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स भी दबाव में हैं।
Detailed Coverage
विदेशी बिकवाली का असर
23 जुलाई को भारतीय इक्विटी मार्केट में बिकवाली का दबाव जारी रहा, जिससे प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) नेट सेलर्स रहे, जिन्होंने ₹2,999.23 करोड़ के शेयर बेचे। यह बड़ी बिकवाली बाजार की भावना में एक बदलाव का संकेत देती है, जिसने इस महीने की शुरुआत में भारतीय इक्विटी में देखी गई बढ़त को काफी हद तक खत्म कर दिया, जब विदेशी इनफ्लो ₹7,100 करोड़ से ऊपर पहुँच गया था।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का सहारा
विदेशी बिकवाली के बीच, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने दबाव को सोखकर एक संतुलनकारी भूमिका निभाई। DIIs ने दिन के लिए ₹2,947.14 करोड़ की नेट बाइंग दर्ज की। घरेलू निवेशकों का यह निरंतर समर्थन हाल के सत्रों में महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यह विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकालने पर बाजार में बड़ी गिरावट को रोकता है। इसके बावजूद, विदेशी खिलाड़ियों की कुल बिकवाली बाजार की भावना को सतर्क रखने के लिए पर्याप्त थी।
सेक्टर पर असर और बाजार की कमजोरी
BSE सेंसेक्स सत्र के अंत में 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 पर बंद हुआ। इसी तरह, NSE Nifty 50 126.65 अंक यानी 0.53% गिरकर 23,869.60 पर आ गया। यह गिरावट व्यापक थी, जिसमें रियलिटी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इसके विपरीत, ऑटो और मीडिया सेक्टरों ने हरे निशान में समाप्त होकर कुछ लचीलापन दिखाया। ब्रॉडर मार्केट इंडिकेटर्स ने भी सावधानी का संकेत दिया, क्योंकि Nifty मिडकैप 100 और Nifty स्मॉलकैप 100 इंडेक्स दोनों लगभग 1% गिर गए।
हालिया रुझानों को प्रभावित करने वाले कारक
बाजार सहभागियों के लिए यह समय घरेलू इनफ्लो और वैश्विक हेडविंड्स के बीच संतुलन बनाने का है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अक्सर भारत के आयात बिल और महंगाई के अनुमानों पर भारी पड़ती हैं, जिससे निवेशक का भरोसा प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त, चल रहे भू-राजनीतिक तनाव अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं, जिससे कुछ अंतरराष्ट्रीय निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। तकनीकी दृष्टिकोण से, Nifty 50 हाल ही में 20, 50, 100 और 200-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज सहित प्रमुख औसत से नीचे आ गया है, जिसे कुछ बाजार विश्लेषक तकनीकी कमजोरी का संकेत मानते हैं। निवेशक 23,750–23,800 रेंज पर कड़ी नजर रख सकते हैं, जिसे एक महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन माना जा रहा है, जबकि 24,000–24,100 आने वाले सत्रों में तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है।
