FIIs का बड़ा झटका! भारतीय डेट मार्केट से ₹1.23 अरब डॉलर की निकासी, जानिए वजह

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
FIIs का बड़ा झटका! भारतीय डेट मार्केट से ₹1.23 अरब डॉलर की निकासी, जानिए वजह
Overview

विदेशी निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल महीने में भारतीय डेट मार्केट से **$1.23 बिलियन** से ज़्यादा की भारी निकासी की है। यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी बिकवाली है, जो अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड (Treasury Yield) और भारतीय बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर के कम होने और रुपए में बढ़ती अस्थिरता (Volatility) के कारण हुई है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड (Treasury Yield) और भारतीय बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर के तेजी से कम होने और रुपए में बढ़ती अस्थिरता (Volatility) के चलते विदेशी निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल में भारतीय डेट मार्केट से $1.23 बिलियन से ज़्यादा की भारी निकासी की है। यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी बिकवाली है, जो निवेशकों के बीच बढ़ती सावधानी का संकेत देती है।

यील्ड का अंतर घटा:
इस बड़ी निकासी का एक मुख्य कारण यह है कि भारतीय गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) और अमेरिकी ट्रेज़री (U.S. Treasuries) के बीच यील्ड का अंतर तेजी से कम हुआ है। यह गैप घटकर लगभग 200-250 basis points रह गया है, जो पहले औसतन 300-400 basis points हुआ करता था। यील्ड का यह छोटा प्रीमियम अब भारतीय डेट को अमेरिकी सुरक्षित संपत्तियों की तुलना में कम आकर्षक बना रहा है, क्योंकि इसमें जोखिम-समायोजित रिटर्न (risk-adjusted returns) कम मिल रहा है।

रुपए की अस्थिरता और बढ़ी हेजिंग की लागत:
चिंताओं को बढ़ाने वाली एक और बात यह है कि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है, और हाल ही में पहली बार 95 के पार चला गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों (geopolitical tensions) से प्रेरित यह अस्थिरता सीधे तौर पर विदेशी निवेशकों को प्रभावित कर रही है। जब वे अपना मुनाफ़ा डॉलर में बदलते हैं, तो रुपए की गिरावट उनके कुल रिटर्न को कम कर देती है। इसके अलावा, बढ़ी हुई अस्थिरता के कारण करेंसी रिस्क को हेज (hedge) करने की लागत भी तेजी से बढ़ गई है, जो एक अतिरिक्त खर्च है और भारतीय डेट इंस्ट्रूमेंट्स की आकर्षकता को कम कर रहा है।

बॉन्ड यील्ड का भविष्य:
भारतीय डेट पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। 17 अप्रैल 2026 तक, भारत की 10-वर्षीय G-Sec पर 6.94% यील्ड मिल रही थी, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी पर 4.25% यील्ड थी। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दीपांविता मजूमदार (Dipanwita Mazumdar) का अनुमान है कि निकट अवधि में 10-वर्षीय यील्ड 6.9% से 7.10% के बीच रह सकती है, और यदि भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं हुए तो इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। YES Bank की रिपोर्ट्स बताती हैं कि यील्ड फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही तक 6.75%-7.25% की रेंज में रह सकती है। ये सभी कारक मिलकर भारतीय बॉन्ड होल्डर्स के लिए एक चुनौतीपूर्ण परिदृश्य पेश कर रहे हैं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.