FIIs की बिकवाली जारी! जून में भारतीय शेयरों से निकाले ₹29,170 करोड़

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FIIs की बिकवाली जारी! जून में भारतीय शेयरों से निकाले ₹29,170 करोड़

जून महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों से लगातार चौथे महीने बिकवाली जारी रखी। इस दौरान उन्होंने कुल ₹29,170 करोड़ निकाले। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹85,800 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभाले रखा।

जून में FIIs की बिकवाली का दौर

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जून में भी भारतीय शेयर बाजारों से पैसा निकालना जारी रखा। यह लगातार चौथा महीना था जब FIIs ने नेट सेलिंग की। जून के दौरान, विदेशी निवेशकों ने कुल ₹29,170 करोड़ की निकासी की।

DIIs का सहारा

इस भारी बिकवाली के बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को बड़ा सहारा दिया। DIIs ने इस महीने ₹85,800 करोड़ का निवेश किया, जिससे निफ्टी इंडेक्स महीने भर में 1.4% की मामूली बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा।

बैंकिंग सेक्टर में दिखा दम

हालांकि विदेशी निवेशक कई सेक्टर्स में बिकवाली कर रहे थे, लेकिन उन्होंने बैंकिंग और वित्तीय सेवा (BFSI) सेक्टर पर खास ध्यान दिया। जून में BFSI सेक्टर में $357 मिलियन का शुद्ध निवेश आया, जो विदेशी पूंजी के लिए सबसे पसंदीदा जगह बनकर उभरा। इस खरीदारी के चलते BFSI सेक्टर का विदेशी होल्डिंग्स में हिस्सा बढ़कर 30.8% हो गया, जो पिछले महीने 29.5% था। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स में भी कुछ विदेशी निवेश आया।

ऑटो और IT से बड़ी निकासी

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों ने उन सेक्टर्स से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला जो पहले उनके पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा थे। ऑयल एंड गैस सेक्टर से सबसे ज्यादा $1.40 बिलियन की निकासी हुई। ऑटो सेक्टर में भी $1.10 बिलियन की बिकवाली देखी गई, जबकि आईटी (IT) और मेटल सेक्टर्स से क्रमशः $788 मिलियन और $961 मिलियन निकाले गए। पावर स्टॉक्स से भी $668 मिलियन की निकासी हुई।

प्राइमरी मार्केट में जारी रहा भरोसा

सेकेंडरी मार्केट में सावधानी बरतने के बावजूद, विदेशी निवेशकों ने भारत के प्राइमरी मार्केट (IPO और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) में रुचि बनाए रखी। जून में, मौजूदा लिस्टेड शेयरों से बड़ी रकम निकालने के बावजूद, विदेशी निवेशकों ने नए इश्यू के जरिए ₹6,000 करोड़ का निवेश किया। यह दिखाता है कि सेकेंडरी मार्केट के मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर चिंता के बावजूद, नई भारतीय कंपनियों की लिस्टिंग को लेकर उनका लॉन्ग-टर्म भरोसा कायम है। पिछले एक साल में, प्राइमरी ऑफरिंग में विदेशी पूंजी की भागीदारी कुल ₹72,800 करोड़ रही है।

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