FIIs की बंपर खरीदारी! ₹3,624 करोड़ निवेश, Nifty और Sensex बढ़त के साथ बंद

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AuthorAditya Rao|Published at:
FIIs की बंपर खरीदारी! ₹3,624 करोड़ निवेश, Nifty और Sensex बढ़त के साथ बंद

30 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में **₹3,624 करोड़** का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार तीसरे दिन की खरीदारी थी। हालांकि, घरेलू निवेशकों ने **₹1,864 करोड़** की बिकवाली की, लेकिन बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ।

विदेशी और घरेलू निवेशकों की अलग-अलग चाल

30 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ारों में मजबूती दिखी। Nifty 50 66.95 अंक चढ़कर 24,317.15 पर और Sensex 273.55 अंक बढ़कर 77,928.15 पर बंद हुआ। इस उछाल की मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ खरीदारी रही, जिन्होंने लगातार तीसरे सत्र में बाज़ार में पैसा लगाया।

एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने ₹17,432 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹13,808 करोड़ के बेचे, जिससे उनका शुद्ध निवेश ₹3,624 करोड़ रहा। वहीं, दूसरी ओर डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs), जिनमें म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां शामिल हैं, ने मुनाफावसूली या पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग करते हुए ₹1,864 करोड़ के शेयर बेचे। DIIs ने कुल ₹17,980 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹19,844 करोड़ की बिकवाली की।

सेक्टरों में दिखी मिली-जुली तस्वीर

इस सत्र में विभिन्न सेक्टर्स में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला। Nifty Auto इंडेक्स में 1.6% की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें Mahindra & Mahindra, Eicher Motors और Maruti Suzuki जैसे बड़े शेयरों का योगदान रहा। यह सेक्टर घरेलू खपत के रुझानों में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। इसके विपरीत, Nifty Realty इंडेक्स में 2% की गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों ने रियल एस्टेट शेयरों में बिकवाली की। Adani Ports, Shriram Finance और HDFC Life जैसे शेयर भी दिन के निचले स्तरों पर कारोबार करते दिखे।

वैश्विक और घरेलू चिंताएं

बाज़ार के प्रतिभागी इस समय कई ग्लोबल और घरेलू चिंताओं से जूझ रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय अनुमानित था, लेकिन महंगाई पर उनकी टिप्पणियों ने बॉन्ड यील्ड को ऊंचा बनाए रखा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इन दबावों के बावजूद, विदेशी पूंजी का निरंतर प्रवाह और स्थिर घरेलू आर्थिक संकेतकों ने इक्विटी की कीमतों को सहारा दिया है। बाजार की यह क्षमता कि वह घरेलू संस्थाओं की बिकवाली को अवशोषित कर सके, जबकि विदेशी निवेश सकारात्मक बना रहे, यह दर्शाता है कि निवेशक वर्तमान में शेयरों को जमा करने के लिए कीमतों में गिरावट का फायदा उठा रहे हैं। आने वाले सत्रों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या विदेशी खरीदारी की यह निरंतरता बनी रहती है या घरेलू संस्थाएं वैश्विक बॉन्ड यील्ड में और उतार-चढ़ाव के जवाब में अपनी रणनीति बदलती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.