बाज़ार में तेज़ी का मुख्य कारण: FIIs की खरीदारी ने DIIs की बिकवाली को काटा
सोमवार, 23 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार तेज़ी देखने को मिली। BSE Sensex 479.95 अंकों की ज़बरदस्त बढ़त के साथ 83,294.66 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 भी 141.75 अंक चढ़कर 25,713 पर पहुंच गया। इस तेज़ी के पीछे सबसे बड़ा हाथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रहा, जिन्होंने बाज़ार में ₹3,484 करोड़ का निवेश किया। यह निवेश पिछली बार की बिकवाली के रुझान को पलटने वाला था। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,292 करोड़ की मुनाफावसूली करते हुए शेयर बेचे। यह दिखाता है कि कैसे FIIs और DIIs के बीच बाज़ार में पैसों का फ्लो (Flow) बना रहता है। उदाहरण के तौर पर, 20 फरवरी 2026 को FIIs ने ₹934.61 करोड़ के शेयर बेचे थे, जबकि DIIs ने ₹2,637.15 करोड़ का निवेश किया था।
अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता के बीच बाज़ार का मिज़ाज
वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ (tariffs) उपायों को रद्द करने के फैसले से कुछ अनिश्चितता थी। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने तुरंत नया 15% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की ओर कदम बढ़ाए, जिससे चिंताएं बढ़ीं। इसके बावजूद, अमेरिकी शेयर बाज़ार जैसे Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq Composite शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को बढ़त के साथ बंद हुए।
भारतीय बाज़ार की बात करें तो, Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 22.4 और Sensex का 22.7 के स्तर पर बना हुआ है, जो कि ऐतिहासिक रूप से थोड़ा ऊंचा माना जा सकता है। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप (market cap) करीब ₹469 लाख करोड़ के आंकड़े को छू रहा है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि फरवरी में FIIs ने भारतीय शेयरों में लगभग ₹16,912 करोड़ का निवेश किया है, लेकिन उनके डेरिवेटिव (derivatives) सेगमेंट में 71% की शॉर्ट-हेवी (short-heavy) पोजीशनिंग बताती है कि वे पूरी तरह से 'रिस्क-ऑन' (risk-on) मोड में नहीं हैं। इस चयनात्मक निवेश (selective investment) के बीच, FIIs ने IT शेयरों से बिकवाली की है और AI से जुड़ी चिंताओं के चलते फाइनेंसियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
जोखिम क्या हैं? एक्सपर्ट्स की चेतावनी
बाज़ार में FIIs के कैश सेगमेंट में निवेश के बावजूद, डेरिवेटिव्स में उनकी भारी शॉर्ट पोज़ीशन (short position) एक संकेत है कि बाज़ार में तेज़ी शायद उतनी मज़बूत न हो जितनी दिख रही है। अमेरिकी टैरिफ के नए नियम वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव (volatility) ला सकते हैं।
भारतीय शेयर बाज़ार पहले से ही ऊंचे मूल्यांकन (valuation) पर है, Nifty 50 का P/E 22.4 और Sensex का 22.7 पर है। ऐसे में, अगर फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए अनुमानित 12-15% की कॉर्पोरेट कमाई (earnings growth) उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, या वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tension) बढ़ा, तो बाज़ार में बड़ी गिरावट आ सकती है। DIIs का सपोर्ट महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर विदेशी निवेशक बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अपना निवेश कम करते हैं, तो यह सपोर्ट भी कम पड़ सकता है।
आगे क्या? बाज़ार की चाल किस पर निर्भर करेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के दौरान FIIs का निवेश जारी रह सकता है, बशर्ते घरेलू कंपनियों की कमाई (earnings) बढ़ती रहे और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात (geopolitical situation) स्थिर बने रहें। FY27 के लिए कमाई का अनुमान 12-15% के दायरे में है।
बाज़ार की आगे की दिशा अमेरिका की नई टैरिफ नीति के विकास, प्रमुख सेक्टर्स जैसे फाइनेंसियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स के प्रदर्शन, और घरेलू तरलता (liquidity) की विदेशी निवेशकों की संभावित सतर्कता को संभालने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशक बारीकी से नज़र रखेंगे कि नई अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था वैश्विक व्यापार प्रवाह (trade flows) और कंपनियों के मार्जिन को कैसे प्रभावित करती है, और भारतीय शेयरों में सेक्टर रोटेशन (sector rotation) कैसे जारी रहता है।