FIIs की बिकवाली, बाजार धड़ाम! Sensex-Nifty **2%** लुढ़के, विदेशी निवेशकों ने बेचे **₹17,140 Cr** के शेयर

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
FIIs की बिकवाली, बाजार धड़ाम! Sensex-Nifty **2%** लुढ़के, विदेशी निवेशकों ने बेचे **₹17,140 Cr** के शेयर
Overview

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और IT शेयरों में कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली के कारण इस हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ार धड़ाम हो गया। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) लगभग **2%** लुढ़क गए, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने **₹9,780 करोड़** की खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

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बाजार क्यों गिरा? FIIs की बिकवाली और जियोपॉलिटिकल टेंशन

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) 25 अप्रैल को समाप्त हुए हफ्ते में लगभग 2% की गिरावट के साथ बंद हुए। यह अप्रैल महीने में उनकी पहली बड़ी साप्ताहिक गिरावट थी, और लगातार दो हफ्तों की तेजी पर ब्रेक लग गया।

इस गिरावट की आग में घी का काम किया विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने। उन्होंने इस हफ्ते ₹17,140 करोड़ के शेयर बेचे। यह अप्रैल महीने में FIIs द्वारा की गई ₹56,360 करोड़ की बड़ी निकासी के सिलसिले को जारी रखता है।

DIIs ने संभाला मोर्चा, IT शेयरों पर टूटा कहर

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस भारी बिकवाली के असर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने हफ्ते के दौरान ₹9,780 करोड़ के शेयर खरीदे, और इसी महीने अब तक ₹39,480 करोड़ की खरीदारी कर चुके हैं।

बाजार में एक स्पष्ट 'सेक्टर रोटेशन' (sector rotation) देखने को मिला। तिमाही नतीजों की कमजोरी और भविष्य को लेकर मिली-जुली गाइडेंस के कारण IT शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। वहीं, FMCG, फार्मा और पावर जैसे डिफेंसिव और घरेलू मांग पर केंद्रित सेक्टर्स में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की तलाश में दिलचस्पी दिखाई।

मिडिल ईस्ट टेंशन और कमजोर रुपया बढ़ाए मुसीबत

मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, खासकर स्टॉल किए गए अमेरिका-ईरान वार्ता और कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना, ने निवेशकों के रिस्क ऐपेटाइट (risk appetite) को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके साथ ही, कमजोर होता भारतीय रुपया (Rupee) भी चिंता का एक बड़ा कारण बना, जिससे आयात महंगा हुआ और महंगाई की चिंताएं बढ़ीं।

विश्लेषकों की राय और आगे की राह

बजाज ब्रोकिंग के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट - रिसर्च, पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, FIIs की बिकवाली ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक और जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स का नतीजा है। वहीं, जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर ने यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे ग्लोबल हेडविंड्स और RBI द्वारा आर्थिक सुस्ती के शुरुआती संकेतों को बाजार पर दबाव का कारण बताया।

आगे चलकर, संस्थागत प्रवाह (institutional activity) ग्लोबल डेवलपमेंट, खासकर फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की अगली दर निर्णय (rate decision) पर बहुत निर्भर करेगा। डॉलर के मजबूत होने की आशंका और FIIs की लगातार बिकवाली उभरते बाजारों के लिए चिंता का सबब बन सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.