6 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ारों में रौनक लौटी। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹3,791 करोड़ की इक्विटी खरीदी, वहीं फॉरेन इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भी ₹243 करोड़ का नेट इनफ्लो किया। MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज बढ़ने के बाद यह पॉजिटिव संकेत जून-तिमाही के नतीजों से पहले आया है।
बाज़ार में लौटी रौनक, सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान पर
6 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ारों में तेजी का रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांकों ने लगातार दूसरे सत्र में बढ़त दर्ज की। BSE सेंसेक्स 303 अंक चढ़कर 77,462 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 लगभग 89 अंक बढ़कर 24,132 पर पहुंच गया।
इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का एक्शन
बाज़ार में इस तेजी के पीछे डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का बड़ा हाथ रहा। उन्होंने दिनभर की ट्रेडिंग में ₹3,791.42 करोड़ की नेट खरीदारी की। DIIs ने कुल ₹19,727.56 करोड़ की खरीदारी की, जबकि ₹15,936.14 करोड़ की बिकवाली की।
वहीं, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भी बाज़ार में वापसी की और ₹243.03 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया। यह विदेशी निवेशकों की बिकवाली के हालिया रुझान को तोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बाज़ार में विदेशी पूंजी प्रवाह को स्थिर करने का संकेत दे सकता है।
MSCI में भारत का बढ़ता महत्व और सेक्टर पसंद
वैश्विक पोर्टफोलियो में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। जून में MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में देश का वेटेज बढ़कर 11.1% हो गया, जो मई में 10.9% था। हालांकि, जून में भारतीय इक्विटी में विदेशी हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 14.2% रह गई, जो पिछले महीने 14.4% थी।
FIIs का निवेश मुख्य रूप से कुछ खास सेक्टर्स में केंद्रित है। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में FIIs की संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा 30.8% है। इसके अलावा, कैपिटल गुड्स (7.5%), फार्मा (7.4%), ऑटो (7.3%) और ऑयल एंड गैस (6.8%) जैसे सेक्टर भी पसंदीदा हैं। ये पांचों सेक्टर मिलकर विदेशी होल्डिंग्स का लगभग 60% हिस्सा बनाते हैं।
जून-तिमाही नतीजों का इंतज़ार
अब बाज़ार की निगाहें जून-तिमाही के नतीजों पर टिकी हैं। अनुमान है कि Nifty 50 कंपनियों के मुनाफे में साल-दर-साल लगभग 10% की वृद्धि देखी जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और मजबूत रुपया घरेलू कंपनियों के प्रदर्शन के लिए सहायक माने जा रहे हैं।
निवेशक इस बात पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि क्या वास्तविक नतीजे उम्मीदों के अनुरूप आते हैं। मार्जिन और रेवेन्यू के आंकड़े मौजूदा बाज़ार रैली की स्थिरता तय करेंगे। आने वाले हफ्तों में मैनेजमेंट की ओर से डिमांड ट्रेंड्स और इनपुट कॉस्ट्स पर आने वाली टिप्पणियां महत्वपूर्ण होंगी।
