FIIs, DIIs ने फूंके ₹4,623 करोड़, भारतीय शेयर बाजार में दूसरे दिन तेजी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
FIIs, DIIs ने फूंके ₹4,623 करोड़, भारतीय शेयर बाजार में दूसरे दिन तेजी

10 जुलाई को विदेशी और घरेलू निवेशकों ने ₹4,623 करोड़ के शेयर खरीदे, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन चढ़ गए। बाजार अब कॉरपोरेट प्रॉफिट का पता लगाने के लिए जून तिमाही के नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

बाजार में लौटी रौनक, FIIs और DIIs का बढ़ा भरोसा

10 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहा, क्योंकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) ने खरीदारी की। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने ₹2,603.72 करोड़ के इक्विटी खरीदे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹2,019.68 करोड़ का निवेश किया। इस तरह, एक ही दिन में कुल मिलाकर ₹4,623 करोड़ से अधिक का निवेश आया।

सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल

इस खरीदारी के दम पर बेंचमार्क इंडेक्स में अच्छी उछाल देखी गई। BSE सेंसेक्स 1,021.49 अंक चढ़कर 77,952.58 पर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 313.95 अंक बढ़कर 24,318.35 पर पहुंच गया। बैंकिंग, आईटी (IT) और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख सेक्टरों ने इस तेजी में अहम भूमिका निभाई।

अब नतीजों पर टिकी हैं निगाहें

बाजार में हालिया रिकवरी के बाद, निवेशकों का ध्यान अब जून तिमाही के नतीजों पर केंद्रित हो गया है। यह दौर इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे कंपनियों के ऑपरेटिंग कॉस्ट और प्रॉफिट मार्जिन का पता चलेगा, खासकर बदलते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल में। निवेशक आमतौर पर डिमांड ट्रेंड्स और कच्चे माल की कीमतों या ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियों से मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव पर मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार करते हैं।

भारतीय इक्विटी के लिए स्थिरता के कारक

फिलहाल, बाजार के सेंटिमेंट को कई कारक सहारा दे रहे हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल को मैनेज करने और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, औद्योगिक गतिविधि और कंज्यूमर डिमांड सहित समग्र घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल, इन निवेशों की स्थिरता पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों के लिए फोकस का एक महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है।

अगले कुछ हफ्तों में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यक्तिगत कंपनियां उम्मीदों पर कैसी खरी उतरती हैं। हालांकि संस्थागत खरीदारी लिक्विडिटी प्रदान करती है और कीमतों को सहारा देती है, लेकिन आने वाले दिनों में वास्तविक स्टॉक परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि तिमाही नतीजों में रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार दिखता है या नहीं। इन वित्तीय खुलासों पर नज़र रखना मौजूदा बाजार के रुझान की ताकत को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।

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