7 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में **₹393 करोड़** की खरीदारी की, लगातार दूसरे दिन यह इनफ्लो जारी रहा। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने **₹383 करोड़** की बिकवाली की, जिससे बाजार दिनभर संतुलित रहा। जून तिमाही के नतीजों से पहले वित्तीय और ऑटो शेयरों पर फोकस के चलते प्रमुख सूचकांकों में तेजी देखी गई।
विदेशी निवेश का रहा जोर
7 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार ने मामूली बढ़त के साथ कारोबार समेटा, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे दिन खरीदारी जारी रखी। BSE Sensex 270.01 अंक चढ़कर 77,732.95 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 ने 61.20 अंक की बढ़त के साथ 24,193.30 का स्तर छुआ।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी ₹18,414.01 करोड़ रही, जबकि बिकवाली ₹18,020.82 करोड़ दर्ज की गई। इस तरह, FIIs का कुल नेट इनफ्लो ₹393.19 करोड़ रहा। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान बिकवाली का रुख अपनाया। डोमेस्टिक फंड्स ने ₹18,897.44 करोड़ की ग्रॉस खरीदारी की, लेकिन ₹19,280.87 करोड़ के शेयर बेच दिए, जिससे ₹383.43 करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ।
नतीजों से पहले सेक्टरों पर फोकस
बाजार में सकारात्मक माहौल का मुख्य कारण वित्तीय (Financial) और ऑटोमोबाइल (Automotive) सेक्टरों में हुई खरीदारी रही। निवेशक जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों (Corporate Earnings) के आने से पहले अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट कर रहे हैं। इस तिमाही के नतीजे प्रमुख उद्योगों में मांग के रुझान (Demand Trends) और लाभ मार्जिन (Profit Margins) पर अहम जानकारी दे सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि घरेलू फंडों की बिकवाली के बावजूद सूचकांकों में मजबूती बनी रही। Sensex और Nifty दोनों में महत्वपूर्ण वेटेज रखने वाले वित्तीय शेयरों ने दिनभर सकारात्मक गति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
बाजार का आगे का रुख
आगे चलकर, जैसे-जैसे नतीजों की घोषणा शुरू होगी, निवेशक बाजार के व्यवहार पर बारीकी से नजर रखेंगे। कुछ विश्लेषकों को हालिया उछाल के बाद समेकन (Consolidation) की उम्मीद है, वहीं अन्य विशिष्ट इंडेक्स स्तरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। Nifty पर 24,200 से 24,600 का दायरा संभावित कंसॉलिडेशन जोन के रूप में देखा जा रहा है। 24,000 से 24,200 के आसपास सपोर्ट स्तरों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, क्योंकि इन क्षेत्रों ने पहले भी खरीदारी को आकर्षित किया है। अगले कुछ हफ्तों में सेक्टर-विशिष्ट उतार-चढ़ाव की दिशा तय करने में कंपनियों के नतीजे अहम साबित होंगे।
