FIIs ने ₹1,355 करोड़ की खरीदारी की, DIIs ने की भारी बिकवाली

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FIIs ने ₹1,355 करोड़ की खरीदारी की, DIIs ने की भारी बिकवाली

3 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में **₹1,355.33 करोड़** का शुद्ध निवेश किया, जिससे वे शुद्ध खरीदार बन गए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इसी दिन **₹1,953.89 करोड़** की बिकवाली की। इसके बावजूद, निफ्टी 50 जैसे प्रमुख सूचकांक **24,000** के पार बंद हुए।

बाजार में क्या हुआ?

3 जुलाई, 2026 को विदेशी निवेशकों का रुख बदला। उन्होंने भारतीय शेयरों की खरीद-बिक्री में खरीद का पलड़ा भारी रखा, जिसके चलते बाजार में ₹1,355.33 करोड़ का शुद्ध इनफ्लो आया। यह उस दिन हुआ जब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,953.89 करोड़ के शेयर बेचकर मुनाफा कमाया। घरेलू निवेशकों की इस बिकवाली के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार के सूचकांक दिन के अंत में सकारात्मक क्षेत्र में रहे। BSE सेंसेक्स 77,145.00 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 24,000.85 के स्तर पर, यानी 24,000 के पार बंद हुआ।

बाजार की चाल और निवेशकों का प्रवाह

एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने सत्र के दौरान कुल ₹13,337.33 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹11,982.00 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, DIIs, जिनमें घरेलू म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां शामिल हैं, ने ₹18,676.35 करोड़ की खरीदारी के मुकाबले ₹20,630.24 करोड़ की बिकवाली दर्ज की। विदेशी और घरेलू प्रवाह के बीच यह अंतर ट्रेडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण पैमाना है, क्योंकि यह अक्सर लार्ज-कैप स्पेस में अल्पकालिक लिक्विडिटी तय करता है।

भावना में बदलाव क्यों?

बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि भावना में यह हालिया बदलाव वैश्विक आर्थिक कारकों से जुड़ा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध के अनुसार, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और संयुक्त राज्य अमेरिका के श्रम बाजार के आंकड़ों के नरम पड़ने से निवेशकों का मूड सुधरा है। इसके अलावा, इस बात की बढ़ती उम्मीद है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक अधिक अनुकूल ब्याज दर के माहौल की ओर बढ़ सकते हैं, जो आम तौर पर भारत जैसे उभरते बाजारों की इक्विटी का समर्थन करता है।

पूंजी प्रवाह का दीर्घकालिक रुझान

हालांकि 3 जुलाई का एक दिवसीय बदलाव सकारात्मक है, लेकिन साल-दर-तारीख (year-to-date) की तस्वीर संस्थागत व्यवहार में एक महत्वपूर्ण अंतर को उजागर करती है। इस साल अब तक, FIIs भारतीय इक्विटी के शुद्ध विक्रेता रहे हैं, जिन्होंने कुल ₹3.47 लाख करोड़ की बिकवाली की है। इसके विपरीत, DIIs लगातार बाजार के लिए प्राथमिक समर्थन रहे हैं, जिन्होंने इसी अवधि में ₹4.60 लाख करोड़ के शेयर जमा किए हैं। विदेशी पूंजी के बहिर्वाह के समय भारतीय बाजारों के लिए यह घरेलू खरीदारी एक महत्वपूर्ण सहारा रही है।

निवेशक क्या ट्रैक करें?

आगे चलकर, इस FII खरीदारी की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी जिस पर नज़र रखनी होगी। निवेशक अक्सर इस बात पर गौर करते हैं कि क्या यह उलटफेर एक अस्थायी कदम है या वैश्विक पूंजी पुन: आवंटन में एक बड़े रुझान की शुरुआत है। इसके अलावा, बाजार के जानकार घरेलू कॉर्पोरेट आय (corporate earnings) और मुद्रास्फीति (inflation) के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे, क्योंकि विश्लेषकों का मानना है कि संभावित आय में कटौती का जोखिम बना हुआ है जो आने वाले हफ्तों में संस्थागत भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।

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