शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में रिकवरी देखने को मिली, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इक्विटी में **₹2,603 करोड़** का निवेश किया। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद, यह खरीदारी भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। निवेशक अब इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि क्या ये इनफ्लो मौजूदा स्तरों पर इंडेक्स को सहारा देना जारी रखेंगे।
बाज़ार में आई तूफानी तेज़ी!
शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बाज़ारों ने दिन के दौरान एक बड़ी वापसी की। सेंसेक्स और निफ्टी, जो सुबह के कारोबार में भारी गिरावट दिखा रहे थे, निचले स्तरों पर खरीदारी (bargain hunting) के कारण वापस पटरी पर आ गए। जहां सेंसेक्स शुरू में 711 अंकों तक नीचे चला गया था, वहीं निफ्टी 24,000.20 के स्तर को छूने के बाद संभला। यह रिकवरी इस बात का संकेत है कि घरेलू बाज़ार क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
विदेशी निवेशकों का जलवा!
बाज़ार की इस मजबूती के पीछे एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी रही है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने अकेले शुक्रवार को लगभग ₹2,603.72 करोड़ की इक्विटी खरीदी। यह इस महीने में भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का सिलसिला जारी है। इसी महीने 10 जुलाई तक, FPIs का सेकेंडरी मार्केट में निवेश ₹5,155 करोड़ था, जबकि प्राइमरी मार्केट की भागीदारी को मिलाकर कुल इनफ्लो ₹15,156 करोड़ तक पहुंच गया था।
आर्थिक मजबूती और वैश्विक चाल
बाज़ार में आई इस सकारात्मक चाल के पीछे स्थिर रुपया और सुधरते मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों का भी हाथ है, जो वैश्विक पूंजी को आकर्षित कर रहे हैं। Geojit Investments के एनालिस्ट्स का कहना है कि भले ही वैश्विक निवेशक पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, फिर भी पूंजी भारत की ओर रुख कर रही है। इसके अलावा, निवेशक उभरते बाज़ारों में प्रदर्शन की तुलना भी कर रहे हैं, जहां दक्षिण कोरिया जैसे अन्य क्षेत्रों में कमजोरी देखी जा रही है, जो भारत की ओर पूंजी को आकर्षित कर सकती है।
आगे क्या?
हालिया रिकवरी से राहत मिली है, लेकिन बाज़ार के प्रतिभागियों को उन कारणों के प्रति सचेत रहना चाहिए जिन्होंने शुरुआती अस्थिरता पैदा की थी। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम अप्रत्याशित बने हुए हैं और आने वाले सत्रों में बाज़ार की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, निवेशक इस बात पर भी नज़र रखेंगे कि क्या FIIs की खरीदारी की यह गति जारी रहती है या वैश्विक जोखिम से बचने की भावना (risk-off sentiment) लौट आती है। इस रिकवरी की निरंतरता काफी हद तक विदेशी फंड फ्लो की स्थिरता और आने वाली तिमाही नतीजों के मौसम में घरेलू कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
