FCNR(B) Deposits: 45 दिन में ₹26 अरब पार, 2013 का रिकॉर्ड टूटा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
FCNR(B) Deposits: 45 दिन में ₹26 अरब पार, 2013 का रिकॉर्ड टूटा!

भारत में FCNR(B) डिपॉजिट्स ने सिर्फ 45 दिनों में **$26 अरब** का आंकड़ा पार कर लिया है, जो 2013 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ रहा है। उम्मीद है कि इससे बैलेंस ऑफ पेमेंट (Balance of Payments) मजबूत होगा और रुपये (Rupee) को सहारा मिलेगा।

Detailed Coverage

45 दिन में ₹26 अरब का बड़ा आंकड़ा!

भारत में फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) डिपॉजिट्स (FCNR(B) Deposits) में जबरदस्त उछाल देखा गया है। सिर्फ 45 दिनों के भीतर इन डिपॉजिट्स का आंकड़ा $26 अरब से ऊपर पहुंच गया है। यह 2013 की स्पेशल डिपॉजिट स्कीम के मुकाबले काफी तेज है, जिसने इतने ही आंकड़े तक पहुंचने में लगभग तीन महीने का समय लिया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 17 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, कुल $20.7 अरब का इनफ्लो हुआ है, जिसमें से $17.4 अरब सीधे FCNR(B) डिपॉजिट्स से आए हैं।

बैलेंस ऑफ पेमेंट और करंट अकाउंट पर असर

इस भारी इनफ्लो से भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि स्कीम खत्म होने तक, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (Overseas Foreign Currency Borrowings) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (External Commercial Borrowings) को मिलाकर कुल इनफ्लो $80-85 अरब तक पहुंच सकता है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे करंट फिस्कल ईयर के लिए अनुमानित $65-70 अरब के बैलेंस ऑफ पेमेंट डेफिसिट (Balance of Payments Deficit) की जगह $50 अरब से ज्यादा का सरप्लस (Surplus) देखने को मिल सकता है। साथ ही, करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) घटकर जीडीपी (GDP) के 1.0 से 1.2% के बीच आ सकता है, जो बाहरी कमजोरियों को संभालने में मददगार होगा।

पब्लिक सेक्टर बैंक और रिन्यूअल का रोल

यह डिपॉजिट जुटाने का सबसे बड़ा जरिया पब्लिक सेक्टर बैंक (Public Sector Banks) ही रहेंगे। कुल अनुमानित इनफ्लो के पीछे एक बड़ी वजह मौजूदा डिपॉजिट्स का रिन्यूअल (Renewal) है। FCNR(B) डिपॉजिट्स का एक बड़ा हिस्सा अगस्त और सितंबर में मैच्योर होने वाला है। मौजूदा स्कीम के तहत ऊंची इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) की वजह से निवेशक अपने फंड को रिन्यू करने की उम्मीद है। अनुमान है कि सिर्फ इन रिन्यूअल्स से $10 अरब का अतिरिक्त इनफ्लो हो सकता है।

RBI का हस्तक्षेप और रुपये की स्थिरता

विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) के इस बड़े इनफ्लो के बावजूद, भारतीय रुपये की स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। जुलाई के मध्य तक FCNR(B) इनफ्लो $17.4 अरब रहा, लेकिन इसी अवधि में (8 जून के बाद) देश की फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) में सिर्फ $7.6 अरब की बढ़ोतरी हुई। यह दिखाता है कि मिले कुल डिपॉजिट्स और रिजर्व में हुई वास्तविक बढ़ोतरी के बीच एक अंतर है। यह भी देखा गया है कि RBI विदेशी मुद्रा बाजार में रोजाना औसतन करीब $14 मिलियन का हस्तक्षेप कर रहा है, जो भारत के कुल $676 अरब के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) के मुकाबले काफी कम है। निवेशक इस पर नजर रखेंगे कि जुलाई के अंत तक फॉरेन करेंसी एसेट्स की बढ़ोतरी की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक $17-20 अरब तक पहुंचती है या नहीं, और केंद्रीय बैंक ग्लोबल दबाव के बीच बाजार की अस्थिरता को कैसे मैनेज करता है।

आगे चलकर, बाजार के लिए मुख्य बात यह होगी कि कुल इनफ्लो कितना रहता है और इसका बैंकों की लिक्विडिटी (Liquidity) पर क्या असर पड़ता है। निवेशक RBI के भविष्य के अपडेट्स पर भी नजर रख सकते हैं कि क्या सेंट्रल बैंक करेंसी को स्थिर करने के लिए अपना हस्तक्षेप बढ़ाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.