भारी-भरकम क्लाइमेट डैमेज का दावा
एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि 1990 से अब तक अमेरिका के उत्सर्जन (emissions) के कारण दुनिया भर में $10.2 ट्रिलियन (लगभग ₹850 लाख करोड़) का ग्लोबल इकोनॉमिक नुकसान हुआ है। इस स्टडी के चलते Exxon Mobil (XOM) पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी का मार्केट कैप करीब $690 बिलियन है, लेकिन कई विश्लेषक इसका P/E रेश्यो 24.7 को बहुत ज्यादा मान रहे हैं, जो इसके पिछले औसत और प्रतिद्वंद्वियों से भी काफी ऊपर है। यह हाई वैल्यूएशन जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव के बढ़ते सबूतों के विपरीत है।
प्रतिद्वंद्वियों से अलग रणनीति?
Exxon Mobil के बड़े प्रतिद्वंदी जैसे Shell और BP भी जांच के दायरे में हैं, लेकिन वे अपनी रणनीति बदल रहे हैं। Shell का P/E रेश्यो 13-15 के आसपास है और मार्केट वैल्यू करीब $223 बिलियन है। BP की वैल्यूएशन और भी कम, लगभग $102 बिलियन है। कुछ यूरोपीय एनर्जी कंपनियां भी रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स से पीछे हटकर फॉसिल फ्यूल पर फोकस कर रही हैं, जो Exxon की रणनीति के समान है। हालांकि, निवेशक इस पर अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। साल की शुरुआत से अब तक Exxon का शेयर करीब 24% चढ़ा है, जबकि Shell का शेयर सिर्फ 7% बढ़ा है।
शेयरधारकों और क्लाइमेट एक्टिविस्ट्स से टकराव
Exxon Mobil शेयरधारकों की ओर से क्लाइमेट एक्शन की मांग का पुरजोर विरोध कर रही है। कंपनी ने एक्टिविस्ट निवेशकों Arjuna Capital और Follow This के खिलाफ केस दायर किया है ताकि उन प्रस्तावों को रोका जा सके जो उत्सर्जन (खासकर Scope 3) में तेजी से कटौती के लिए मजबूर करेंगे। Exxon का तर्क है कि यह कानूनी कदम SEC की सामान्य प्रक्रिया को दरकिनार करता है और उनके ऑपरेशंस में 'घुसपैठ' को रोकने के लिए जरूरी है। इस रणनीति की कुछ बड़े निवेशकों ने आलोचना की है, उनका कहना है कि यह जवाबदेही से बचने का तरीका है। Exxon Mobil का इतिहास रहा है कि वह जलवायु परिवर्तन पर चर्चाओं में एक बड़ी भूमिका निभा चुकी है, कई बार ऐसे समूहों को फंड किया है जिन्होंने क्लाइमेट साइंस पर सवाल उठाए थे। कंपनी अब कहती है कि वह क्लाइमेट जोखिमों को मानती है और उसके अपने ऑपरेशंस के लिए उत्सर्जन कम करने की योजनाएं हैं जो Paris Agreement के लक्ष्यों के अनुरूप हैं। लेकिन, इसके बिजनेस फोरकास्ट अभी भी तेल और गैस की उच्च मांग दिखाते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों से थोड़ी राहत, पर जोखिम बरकरार
मध्य पूर्व में संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे Exxon Mobil जैसी कंपनियों को अस्थायी फायदा हुआ है। मार्च 2026 तक Brent क्रूड का भाव $97 प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से बड़ी ऑयल कंपनियों के रेवेन्यू अनुमान बेहतर हुए हैं। हालांकि, ये ऊंची कीमतें महंगाई की आशंकाओं को भी बढ़ाती हैं और वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बन सकती हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि ये कीमतें कब तक बनी रहेंगी या Exxon को वास्तव में कितना फायदा होगा, क्योंकि जारी संघर्ष अर्थव्यवस्था को धीमा भी कर सकता है।
विश्लेषकों की राय बंटी हुई है
विश्लेषकों की Exxon Mobil पर मिली-जुली राय है। वे कंपनी के मजबूत मौजूदा बिजनेस परफॉर्मेंस और बढ़ते क्लाइमेट जोखिमों के बीच संतुलन बना रहे हैं। आम राय 'Hold' रेटिंग की है, जिसका औसत टारगेट प्राइस करीब $148.89 है, जो मौजूदा कीमतों से गिरावट का संकेत देता है। कुछ विश्लेषकों ने अपने टारगेट बढ़ाए हैं, जैसे Bernstein ने $195 का टारगेट दिया है। वहीं, कुछ टारगेट $105 तक नीचे जाते हैं। रिफाइनिंग और केमिकल्स से मुनाफे में गिरावट की चिंताएं, साथ ही तेल की कीमतों में संभावित कमी, इस बंटी हुई राय का कारण हैं। Exxon के कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) जैसे प्रोजेक्ट्स चिंताओं को कम करने के लिए हैं, लेकिन ये उसके मुख्य तेल और गैस बिजनेस की तुलना में खर्च का एक छोटा हिस्सा हैं।