Elon Musk AI: क्या 'यूनिवर्सल हाई इनकम' बचाएगी नौकरियां? महंगा पड़ सकता है ये आइडिया!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
Elon Musk AI: क्या 'यूनिवर्सल हाई इनकम' बचाएगी नौकरियां? महंगा पड़ सकता है ये आइडिया!
Overview

दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे के बीच, अरबपति एलन मस्क ने अपने 'यूनिवर्सल हाई इनकम' (UHI) के पुराने प्रस्ताव को फिर से हवा दी है। उनका मानना है कि AI और रोबोटिक्स उत्पादन क्षमता को इतना बढ़ा देंगे कि माल और सेवाओं की आपूर्ति पैसों की आपूर्ति से ज्यादा हो जाएगी, जिससे महंगाई (Inflation) को रोका जा सकेगा। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, क्योंकि आलोचक इसकी भारी लागत, निर्भरता के जोखिम और सिर्फ पैसे से इंसान की मकसद की जरूरत पूरी न होने जैसे सवाल उठा रहे हैं।

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एलन मस्क का 'यूनिवर्सल हाई इनकम' (UHI) का विजन AI से होने वाली संभावित नौकरियों की कमी का समाधान पेश करता है।

मस्क का तर्क: AI से उत्पादकता बढ़ेगी, महंगाई रुकेगी

मस्क का मुख्य तर्क यह है कि AI और रोबोटिक्स उत्पादन क्षमता में जबरदस्त उछाल लाएंगे। उनका अनुमान है कि इससे पैदा होने वाली वस्तुओं और सेवाओं की प्रचुरता, पैसे की आपूर्ति बढ़ने पर भी महंगाई को रोकेगी। मैकेंजी (McKinsey) जैसी संस्थाओं का अनुमान है कि AI 2030 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में $13 ट्रिलियन जोड़ सकता है।

आलोचकों की तीखी प्रतिक्रिया: 'आर्थिक रूप से त्रुटिपूर्ण'

लेकिन, मस्क की UHI योजना को गंभीर आर्थिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय सरकार के एक वरिष्ठ नीति सलाहकार, संजीव सान्याल (Sanjeev Sanyal) ने इस प्रस्ताव को "आर्थिक रूप से त्रुटिपूर्ण और वित्तीय रूप से खतरनाक" करार दिया है। सान्याल का कहना है कि AI नौकरियों को खत्म करने के साथ-साथ पैदा भी करेगा, और उत्पादन मांग से उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ेगा जितना मस्क अनुमान लगाते हैं, जिससे महंगाई एक वास्तविक चिंता बनी रहेगी। वास्तविक उत्पादन क्षमता में वृद्धि AI के व्यापक रूप से अपनाने के बाद से कुछ हद तक मामूली रही है, और कुछ शोध बताते हैं कि AI-संबंधित आशावाद मांग को बढ़ा सकता है, जिसके लिए मौद्रिक नीति में समायोजन की आवश्यकता हो सकती है।

सामाजिक और निर्भरता संबंधी चिंताएं

वित्तीय चिंताओं से परे, आलोचक UHI सिस्टम के सामाजिक प्रभावों की ओर इशारा करते हैं। कई लोगों का मानना है कि काम केवल आय से कहीं बढ़कर, महत्वपूर्ण सामाजिक जुड़ाव और उद्देश्य की भावना प्रदान करता है। साथ ही, सरकारी सहायता पर बड़े पैमाने पर निर्भरता की संभावना व्यक्तिगत स्वायत्तता और नियंत्रण के बारे में सवाल खड़े करती है। यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) पायलट कार्यक्रमों के मिले-जुले परिणाम सामने आए हैं, जिनमें कुछ अध्ययनों में गरीबी और असमानता में कमी देखी गई, लेकिन कुछ में काम के घंटे कम होने और निर्भरता बढ़ने की भी बात कही गई है।

वैकल्पिक समाधान: OpenAI का प्रस्ताव

अन्य संगठन AI के आर्थिक लाभों को वितरित करने के लिए विभिन्न मॉडल तलाश रहे हैं। उदाहरण के लिए, OpenAI ने स्वचालित श्रम और AI-संचालित मुनाफे पर कर लगाने का प्रस्ताव दिया है ताकि सामाजिक सुरक्षा जाल को समर्थन मिल सके। वे एक राष्ट्रीय पब्लिक वेल्थ फंड (Public Wealth Fund) बनाने का सुझाव देते हैं, जो संभावित रूप से AI कंपनियों से वित्त पोषित हो, ताकि AI-जनित रिटर्न को नागरिकों के साथ साझा किया जा सके, जैसे अलास्का के स्थायी फंड (Alaska's Permanent Fund) में होता है। अन्य विचारों में चार-दिवसीय सप्ताह (four-day week) जैसे छोटे कार्य सप्ताह को प्रोत्साहित करना या श्रमिकों को बदलते नौकरी बाजार के अनुकूल बनाने में मदद करने के लिए समर्पित कार्यकर्ता पुन: प्रशिक्षण खातों (worker retraining accounts) की स्थापना शामिल है।

AI का नौकरी बाजार पर प्रभाव: भविष्य का अनुमान

विश्लेषकों का जोर AI के नौकरी बाजार पर परिवर्तनकारी प्रभाव पर है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान है कि AI विश्व स्तर पर 300 मिलियन नौकरियों को विस्थापित कर सकता है, लेकिन साथ ही नई भूमिकाएँ भी पैदा करेगा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) का अनुमान है कि 2030 तक 78 मिलियन नई नौकरियां पैदा होंगी, बशर्ते कि श्रमिक अपने कौशल को अनुकूलित कर सकें।

विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि AI का अंतिम प्रभाव धीरे-धीरे सामने आएगा, जिससे उत्पादकता बढ़ाने के अवसर और असमानता को चौड़ा करने के जोखिम दोनों पैदा होंगे। इस संक्रमण से निपटने के लिए सक्रिय नीतियां, पुन: कौशल में निवेश और अनुकूल कार्यबल महत्वपूर्ण होंगे।

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