Edelweiss CMD राशेश शाह: तेल का झटका, म‍िडिल ईस्‍ट युद्ध से भारत में आ सकती है मंहगाई और धीमी ग्रोथ की मार (Stagflation)!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Edelweiss CMD राशेश शाह: तेल का झटका, म‍िडिल ईस्‍ट युद्ध से भारत में आ सकती है मंहगाई और धीमी ग्रोथ की मार (Stagflation)!
Overview

Edelweiss CMD राशेश शाह ने बड़ी चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, म‍िडिल ईस्‍ट में जारी जंग और क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें **$100** प्रति बैरल से ऊपर रहने पर भारत में मंहगाई बढ़ने और ग्रोथ (Growth) थमने (Stagflation) का खतरा मंडरा रहा है।

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एनर्जी और जियोपॉलिटिकल झटके

राशेश शाह ने कहा कि यह एनर्जी (Energy) और जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) झटके सीधे तौर पर भारत के करंट अकाउंट (Current Account) और सरकारी खजाने पर असर डालेंगे। उन्होंने 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस (Financial Crisis) या कोविड-19 महामारी के झटकों से इसकी तुलना करते हुए कहा कि यह स्थिति अलग है। शाह ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों (Central Banks) के सामने मुश्किल स्थिति होगी: एक तरफ लगातार बढ़ती मंहगाई को काबू में करना और दूसरी तरफ पहले से नाजुक चल रही ग्रोथ (Growth) को और धीमा होने से बचाना।

नीतियों पर खींची तलवार

इस स्थिति के चलते नीतियां (Policies) अलग-अलग हो सकती हैं। अमेरिका का फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) शायद मंहगाई पर ध्यान केंद्रित करे, जबकि भारत का रिजर्व बैंक (RBI) ग्रोथ और करेंसी की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने को प्राथमिकता दे सकता है। इन नीतियों में अंतर से बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव आ सकता है। हालांकि, शाह ने सरकार की सहायक नीतियों का समर्थन किया, खासकर ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कटौती का, जिसका सालाना खर्च लगभग ₹1.5 लाख करोड़ आता है। उन्होंने कहा कि यह बाहरी झटकों को उपभोक्ता खर्च पर हावी होने से रोकने के लिए एक अहम कदम है। अगर यह संघर्ष जारी रहा तो और अधिक लक्षित सहायता (Targeted Support) भी मिल सकती है।

'टाइम करेक्शन' का दौर

शाह के मुताबिक, मौजूदा बाजार को शेयरों की अपील में कमी के तौर पर नहीं, बल्कि 'टाइम करेक्शन' (Time Correction) के रूप में देखना चाहिए। यह 2021-23 के दौरान आई तेजी के बाद कंसॉलिडेशन (Consolidation) का दौर है, जहां बाजार अपनी पुरानी तेजी को सोख रहा है। उन्होंने जोर दिया कि इक्विटी (Equity) लंबे समय के लिए हैं और बढ़ती कंपनियों से जुड़े हैं। उनकी सलाह 'ड्युअल फोकस' (Dual Focus) की है – लंबी अवधि के लिए निवेश करते हुए शॉर्ट-टर्म की अस्थिरता (Volatility) को मैनेज करना। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार आ रहा पैसा दिखाता है कि निवेशक परिपक्व हो रहे हैं, और अब उनके सवाल 'बाजार कब सुधरेगा' से बदलकर 'मैं अपना पैसा सबसे अच्छे से कैसे लगाऊं' हो गए हैं।

विदेशी बिकवाली के बावजूद भारत की मजबूती

ऊंची वैल्यूएशन (Valuation) और करेंसी दबाव के चलते भारतीय शेयर कुछ विदेशी निवेशकों के लिए फिलहाल कम आकर्षक लग रहे हैं। हालांकि, शाह का मानना है कि 'इंडिया स्टोरी' (India Story) मजबूत बनी हुई है। देश की बढ़ती घरेलू बचत – चाहे वह संस्थानों से हो या व्यक्तिगत निवेशकों से – पूंजी के बहिर्वाह (Outflows) के खिलाफ एक मजबूत सहारा दे रही है, जिससे विदेशी पैसे पर निर्भरता कम हो गई है। इसका मतलब है कि भारत एक अस्थिर ग्रोथ प्ले (Volatile Growth Play) से एक अधिक स्थिर, लंबी अवधि के निवेश गंतव्य (Investment Destination) के रूप में विकसित हो रहा है। वहीं, Edelweiss खुद भी एक अच्छी तरह से प्रबंधित फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म (Financial Platform) बना रहा है, अपने अल्टरनेटिव्स बिजनेस (Alternatives Business) को लिस्ट करने की योजना है और अपने म्यूचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मजबूत वृद्धि देख रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.