Indian Markets: इस हफ़्ते नतीजों और महंगाई के आंकड़ों से तय होगी चाल, Reliance, HDFC Bank पर रहेगी नज़र

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Markets: इस हफ़्ते नतीजों और महंगाई के आंकड़ों से तय होगी चाल, Reliance, HDFC Bank पर रहेगी नज़र

भारतीय शेयर बाज़ार (Dalal Street) के लिए आने वाला हफ़्ता काफी अहम रहने वाला है। बाज़ार की नज़र जून तिमाही के नतीजों (Earnings) और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी है। इस हफ़्ते 140 से ज़्यादा कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी, जिसमें Reliance Industries, HDFC Bank और ICICI Bank जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

नतीजों का मौसम शुरू, बाज़ार पर होगा असर

जून तिमाही के नतीजों का सीज़न शुरू हो चुका है और यह भारतीय शेयर बाज़ारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। बाज़ार के लिए बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजे बेहद मायने रखते हैं, क्योंकि ये कंपनियाँ बेंचमार्क इंडेक्स के 31% से ज़्यादा वज़न रखती हैं। इन कंपनियों का प्रदर्शन न सिर्फ़ निवेशकों के भरोसे को मज़बूत करेगा, बल्कि मौजूदा आर्थिक माहौल में कॉर्पोरेट जगत की सेहत का भी पता देगा।

ग्लोबल संकेत और कच्चे तेल का ख़तरा

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से मिलने वाले संकेत भी भारतीय इक्विटीज़ पर असर डाल रहे हैं। खासकर, कच्चे तेल की कीमतों में चल रही उठापटक पर सबकी नज़र है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ से सप्लाई रूट को लेकर चिंताएं कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी घरेलू मुनाफ़े और महंगाई के लिए ख़तरा बन सकती है। इसके अलावा, अमरीकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिज़र्व के प्रमुख केविन वॉर्श की गवाही पर भी ग्लोबल निवेशक नज़र बनाए हुए हैं, जो भविष्य की ब्याज दरों की दिशा तय कर सकती है।

घरेलू आर्थिक संकेतक

घरेलू मोर्चे पर, जून महीने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं। विश्लेषक इन आंकड़ों से महंगाई के रुझान को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही, रोज़गार और व्यापार संतुलन (Trade Balance) से जुड़े आंकड़े अर्थव्यवस्था की गति को स्पष्ट करेंगे। ये सभी पैरामीटर निवेशकों के लिए यह समझने में मददगार होंगे कि ग्लोबल उथल-पुथल के बीच घरेलू मांग कैसी बनी हुई है।

बाज़ार की चाल और तकनीकी स्तर

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाज़ार में लगातार दिलचस्पी बनी हुई है। स्थिर मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों और रुपये में आई कुछ गिरावट के बावजूद, रुपये का अपेक्षाकृत मज़बूत बना रहना इसका एक कारण है। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी बाज़ार को सहारा दे रहे हैं। प्राइमरी मार्केट की बात करें तो, SBI Funds Management के IPO समेत तीन बड़े IPO और कई SME लिस्टिंग के साथ აქტივਿਟੀ (activity) जारी है।

तकनीकी नज़रिए से देखें तो, Nifty 50 फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स को 24,000 के स्तर के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, जबकि 23,800 और 24,600 के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि, इंडिया VIX (Volatility Index) में नरमी आई है, लेकिन यह अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, क्योंकि बाज़ार इस दायरे से निर्णायक ब्रेकआउट का इंतज़ार कर रहा है।

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