EU का बड़ा कदम: अब ₹250 से कम के इंपोर्ट पर लगेगा ₹250 का अतिरिक्त शुल्क!

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AuthorNeha Patil|Published at:
EU का बड़ा कदम: अब ₹250 से कम के इंपोर्ट पर लगेगा ₹250 का अतिरिक्त शुल्क!

यूरोपियन यूनियन (EU) ने अब 150 यूरो (लगभग ₹13,000) से कम कीमत वाले ई-कॉमर्स इंपोर्ट पर **3 यूरो** (लगभग **₹250**) का नया शुल्क लगा दिया है। इस नियम से Shein, Temu और AliExpress जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों को बड़ा फायदा हो सकता है।

क्या हुआ?

यूरोपियन यूनियन (EU) ने छोटे ई-कॉमर्स शिपमेंट पर 3 यूरो का नया चार्ज लगा दिया है, जो पहले ड्यूटी-फ्री थे। इस नए नियम ने 2008 से चली आ रही 150 यूरो से कम की वैल्यू वाले सामान पर ड्यूटी-फ्री छूट को खत्म कर दिया है। इस कदम का मकसद घरेलू व्यवसायों के लिए एक समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना है, जिन्हें Shein, Temu और AliExpress जैसे ग्लोबल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर मिल रही थी।

यह शुल्क शिपमेंट के अंदर मौजूद सामानों के कस्टम क्लासिफिकेशन के आधार पर लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि अगर एक पार्सल में अलग-अलग तरह की चीजें हैं, तो शुल्क कई गुना बढ़ सकता है, जिससे सस्ते और भारी मात्रा में आने वाले सामानों की लागत काफी बढ़ जाएगी।

EU क्यों लगा रहा है ये शुल्क?

यह पॉलिसी इसलिए बदली गई है क्योंकि ब्लॉक में छोटे, कम वैल्यू वाले पार्सल की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। ऑफिशियल आंकड़े बताते हैं कि 2022 में 1.4 अरब पार्सल इस छूट के तहत आते थे, जो 2025 तक लगभग 5.8 अरब हो गए। यूरोपीय नीति निर्माताओं और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस छूट का गलत इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, जिससे स्थानीय कीमतों को नुकसान पहुंचाकर विदेशी प्लेटफॉर्म्स को अनुचित लाभ मिल रहा था।

ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल पर असर

यह नया कॉस्ट स्ट्रक्चर उन प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस मॉडल को चुनौती देता है जो बिक्री बढ़ाने के लिए बेहद कम कीमतों पर निर्भर हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इन कंपनियों को एक मुश्किल विकल्प का सामना करना पड़ेगा: या तो वे अतिरिक्त लागतें खुद उठाएं, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन कम हो जाएगा, या फिर ग्राहकों से कीमतें बढ़ाएं, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है। कुछ प्लेटफॉर्म्स पहले से ही एहतियाती कदम उठा रहे हैं, जैसे यूरोप के अंदर वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाना ताकि वे ब्लॉक के भीतर से ही बड़े वॉल्यूम में सामान भेज सकें और इन इंपोर्ट-विशिष्ट शुल्कों से बच सकें।

एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स का आउटलुक

लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़े बदलाव की उम्मीद है। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि नियम बदलने के कुछ हफ्तों बाद EU में ई-कॉमर्स एयर कार्गो शिपमेंट में 10% से 35% तक की गिरावट आ सकती है। इस कमी का ग्लोबल एयर फ्रेट की मांग पर असर पड़ सकता है क्योंकि प्लेटफॉर्म्स को अपनी शिपिंग रणनीतियों पर फिर से विचार करना होगा। हालांकि, वर्तमान 3 यूरो का शुल्क एक अस्थायी कदम है, लेकिन यह क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स के लिए सख्त नियमों और भविष्य में पूर्ण पैमाने पर टैक्स लगने की ओर इशारा करता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों को यह नजर रखनी चाहिए कि ये ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स बढ़ते रेगुलेटरी दबाव का सामना कैसे करते हैं। 1 जुलाई, 2028 एक महत्वपूर्ण तारीख है, जब EU इस अस्थायी शुल्क को उत्पाद श्रेणियों के आधार पर एक संरचित ड्यूटी सिस्टम से बदलने की योजना बना रहा है, जो नए EU कस्टम्स अथॉरिटी के लॉन्च के साथ मेल खाएगा। इन लागतों और आने वाले रेगुलेटरी बदलावों के साथ तालमेल बिठाते हुए इन प्लेटफॉर्म्स की अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाए रखने की क्षमता उनके दीर्घकालिक विकास और स्थिरता का एक प्रमुख संकेतक होगी।

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