कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ (PF) निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब नौकरी जाने पर आप अपने पीएफ बैलेंस का केवल 75% ही तुरंत निकाल पाएंगे। बाकी बचे 25% को 12 महीने के लिए लॉक कर दिया गया है।
रिटायरमेंट सेविंग्स पर क्या होगा असर?
पहले, दो महीने की बेरोजगारी के बाद पीएफ अकाउंट में जमा पूरी रकम निकाली जा सकती थी। लेकिन अब, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ईपीएफ स्कीम 2026 के तहत इस नियम को बदल दिया है। नई व्यवस्था के तहत, नौकरी जाने के बाद आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75% तुरंत निकाल सकते हैं।
बाकी बचे 25% फंड पर 12 महीने की लॉक-इन अवधि लागू होगी। यानी, यह पैसा आपको तभी मिलेगा जब आप लगातार पूरे एक साल तक बेरोजगार रहते हैं। ईपीएफओ का मकसद इस बदलाव से लोगों की रिटायरमेंट सेविंग्स को सुरक्षित रखना और कंपाउंडिंग की शक्ति को बचाना है।
क्या हैं नए रेगुलेशंस?
यह बदलाव कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत किया गया है। हालांकि, पीएफ से जुड़े दूसरे अहम नियम पहले जैसे ही रहेंगे। कर्मचारियों और कंपनियों को 12% का बराबर योगदान देना जारी रखना होगा, और ₹15,000 का मौजूदा वेज सीलिंग भी बरकरार है। यह बदलाव सिर्फ पीएफ फंड के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है, ताकि इसे शॉर्ट-टर्म कैश की बजाय रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत साधन के तौर पर देखा जाए।
फाइनेंशियल प्लानिंग पर कैसा होगा असर?
यह नया नियम उन लोगों के लिए थोड़ी राहत देगा जिन्हें नौकरी जाने के तुरंत बाद पैसों की जरूरत होती है, क्योंकि वे 75% तक की रकम निकाल सकते हैं। लेकिन, लंबी बेरोजगारी की स्थिति में 25% का लॉक-इन पीरियड एक बड़ा रिस्क खड़ा करता है।
अब से पीएफ का पैसा लंबी बेरोजगारी के दौरान लिक्विडिटी (तरलता) का पूरा जरिया नहीं रहेगा। इसलिए, यह जरूरी है कि आप एक अलग से इमरजेंसी फंड बनाएं जो कुछ महीनों के खर्चों को कवर कर सके। नए नियमों के लागू होने के बाद, सभी सदस्यों को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग पर दोबारा गौर करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास रिटायरमेंट खातों के बाहर पर्याप्त कैश रिजर्व हो।
