बैंकिंग जैसी रफ्तार, अब EPF में भी!
EPFO अपने पुराने सिस्टम को बदलकर बिल्कुल नया, डिजिटल और तेज बनाने जा रहा है। इसका मकसद PF की रकम निकालने की प्रक्रिया को उतना ही आसान और पारदर्शी बनाना है, जितना रोजमर्रा के बैंक ट्रांजेक्शन (transaction) होते हैं। पहले क्लेम (claim) सेटल होने में काफी देरी होती थी और कागजी कार्रवाई ज्यादा थी, लेकिन अब यह सब बदलने वाला है।
UPI, ATM और ₹5 लाख तक ऑटो-सेटलमेंट: सुविधा ही सुविधा
'EPFO 3.0' का सबसे बड़ा आकर्षण यूपीयआई (UPI) और एटीएम (ATM) आधारित निकासी की सुविधा है। इससे क्लेम प्रोसेस होने का समय काफी कम हो जाएगा। यह भारत की बढ़ती डिजिटल इकॉनमी (digital economy) के साथ कदम मिलाने जैसा है। इसके अलावा, क्लेम के ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को ₹5 लाख तक बढ़ा दिया गया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (financial year) में 3.5 करोड़ से ज्यादा क्लेम सेटल किए गए थे, और इस बड़े बदलाव से काम और भी तेज होगा।
पुरानी IT समस्याओं का होगा खात्मा
यह बदलाव यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और आधार लिंकिंग जैसे पुराने सुधारों पर आधारित है। पहले EPFO को पुरानी IT इंफ्रास्ट्रक्चर (IT infrastructure) की वजह से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जैसे कि क्लेम रिजेक्शन रेट (claim rejection rate) का बहुत ज्यादा होना (FY 2022-23 में करीब 34%)। 'EPFO 3.0' इन पुरानी समस्याओं को दूर करने के लिए एक बड़ा टेक रीसेट (tech reset) है।
पेंशन नियमों में कसावट, क्या सब्सक्राइबर होंगे परेशान?
जहां एक ओर फंड तक पहुंच आसान हो रही है, वहीं दूसरी ओर पेंशन विथड्रॉअल (pension withdrawal) के नियम सख्त किए गए हैं। खासकर, बेरोजगारी के बाद पेंशन निकालने के लिए अब 36 महीने तक का इंतजार करना पड़ सकता है, जबकि पहले यह अवधि सिर्फ 2 महीने थी। यह EPF को एक सुरक्षित रिटायरमेंट सेविंग इंस्ट्रूमेंट (retirement saving instrument) के तौर पर स्थापित करने की कोशिश है, जो नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे दूसरे विकल्पों से इसे अलग बनाता है।
बड़े डिजिटल बदलाव की चुनौतियाँ
इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल माइग्रेशन (digital migration) में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। KYC (नो योर कस्टमर) की समस्याओं के कारण क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा अभी भी बना हुआ है। इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका क्रियान्वयन बड़े सब्सक्राइबर बेस, खासकर कम डिजिटल लिटरेसी (digital literacy) वाले सदस्यों के लिए कितना प्रभावी होता है। एटीएम में पिन चोरी जैसी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी मौजूद हैं।
आगे क्या?
'EPFO 3.0' से सेवाओं में सुधार, आने वाले लेबर कोड्स (labour codes) के साथ तालमेल और कुल मिलाकर यूजर एक्सपीरियंस (user experience) बेहतर होने की उम्मीद है। कागजी कार्रवाई कम करके और ऑटोमेशन (automation) बढ़ाकर, EPFO अपने 7 करोड़ से ज्यादा सदस्यों को बेहतर सेवा देने और उनकी रिटायरमेंट फाइनेंशियल सिक्योरिटी (retirement financial security) सुनिश्चित करने के अपने वादे को पूरा करना चाहता है।