EM Assets का नया कमाल! डॉलर की नरमी और AI बूम से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे शेयर और बॉन्ड

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AuthorMehul Desai|Published at:
EM Assets का नया कमाल! डॉलर की नरमी और AI बूम से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे शेयर और बॉन्ड
Overview

Emerging Markets (EM) के शेयर (Equities) और बॉन्ड (Bonds) ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल कर ली है। यह शानदार प्रदर्शन डॉलर के लगातार कमजोर होने और AI (Artificial Intelligence) को लेकर बढ़ती उम्मीदों का नतीजा है, खासकर एशियाई टेक सेक्टर में।

बाज़ार में आई बड़ी लहर: EM एसेट्स नए शिखर पर

Emerging Markets (EM) के एसेट्स ने इतिहास रच दिया है। MSCI Emerging Markets Index रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें Exchange-Traded Funds (ETFs) के वॉल्यूम में ज़बरदस्त उछाल देखा गया है। इसकी मुख्य वजह है इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) का दुनिया भर के एसेट्स में खरबों डॉलर का निवेश। ये निवेशक अब डेवलप्ड मार्केट्स (Developed Markets) से पैसा निकालकर EM की ओर रुख कर रहे हैं।

इस बड़े बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) का लगातार कमजोर होना। पिछले एक साल में EM इक्विटीज़ ने 33.57% का शानदार रिटर्न दिया है, जो S&P 500 के 17.9% के रिटर्न से कहीं ज़्यादा है। वहीं, अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे विकसित देशों में पॉलिसी अनिश्चितता (Policy Uncertainty) और बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) जैसी चुनौतियाँ EM को आकर्षक बना रही हैं।

डॉलर इंडेक्स पिछले साल 8% गिरा है और 2026 में इसके और 3% गिरने का अनुमान है। डॉलर के कमजोर होने से EM देशों की फाइनेंशियल कंडीशन (Financial Conditions) आसान होती है, डॉलर-डेनॉमिनेटेड कर्ज का बोझ कम होता है और उनकी फिस्कल फ्लेक्सिबिलिटी (Fiscal Flexibility) बढ़ती है। इतिहास गवाह है कि जब डॉलर कमजोर होता है, तो EM इक्विटीज़ ज़बरदस्त प्रदर्शन करती हैं।

AI का जलवा: EM के टेक शेयरों में बहार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर उम्मीदें भी EM के इक्विटी परफॉरमेंस के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो रही हैं। खासकर टेक्नोलॉजी-हैवी देशों, जैसे चीन, साउथ कोरिया और ताइवान में AI हार्डवेयर की मांग तेज़ी से बढ़ी है। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 में EM स्टॉक्स करीब 16% का रिटर्न दे सकते हैं, जिसका एक बड़ा श्रेय टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) को जाएगा।

साउथ कोरिया, मेक्सिको और ब्राज़ील जैसे देशों के बेंचमार्क इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं। AI की वजह से EM इक्विटीज़ में मज़बूती आई है, जिससे 2025 में ग्लोबल वोलेटिलिटी (Volatility) के दौरान भी ये ज़्यादा स्थिर रहीं।

मगर, AI से जुड़ी यह तेज़ी नए जोखिम भी ला रही है। AI के तेज़ी से बढ़ने की क्षमता, खासकर जहां सफ़ेदपोश नौकरियां (White-collar jobs) ऑटोमेशन (Automation) का शिकार हो सकती हैं, वहां यह एक दोधारी तलवार साबित हो सकती है। भारत जैसी सर्विस-डिपेंडेंट इकोनॉमीज़ को इससे झटका लग सकता है। साथ ही, AI-रिलेटेड सेगमेंट्स में बहुत ज़्यादा वैल्यूएशन (Valuation) चिंताएं बढ़ा रहा है, जिससे बाज़ार में अचानक करेक्शन (Correction) का खतरा मंडरा रहा है।

वैल्यूएशन में डिस्काउंट, कैपिटल में रिकॉर्ड इनफ्लो

हालिया शानदार प्रदर्शन के बावजूद, EM इक्विटीज़ अभी भी डेवलप्ड मार्केट्स की तुलना में काफी कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं। चीन को छोड़ दें तो, EM इक्विटीज़ डेवलप्ड मार्केट्स के मुकाबले 30% और अमेरिकी इक्विटीज़ के मुकाबले 40% कम P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रही हैं। जनवरी 2026 तक MSCI EM Index का ट्रेलिंग P/E 16.98 और फॉरवर्ड P/E 13.44 था, जो अमेरिकी बाज़ार के 27.5 के P/E से कोसों दूर है। यह डिस्काउंट, बेहतर फंडामेंटल्स और बढ़ती अर्निंग्स निश्चितता के साथ, EM एसेट्स को निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बना रहा है।

इस वजह से EM में कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflows) भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। अकेले जनवरी 2026 में iShares Core MSCI Emerging Markets ETF में $6.5 बिलियन से ज़्यादा का इनफ्लो देखा गया। यह 'क्वाइट-क्विटिंग' (Quiet-quitting) यानी अमेरिकी एसेट्स से धीरे-धीरे निकलने का ट्रेंड दिखाता है। ग्लोबल एक्टिव फंड्स अभी भी EM में काफी अंडरवेट (Underweight) हैं, जो बताता है कि अभी और कैपिटल रीएलोकेशन (Capital Reallocation) की काफी गुंजाइश है। लैटिन अमेरिकी इक्विटीज़ खास तौर पर चमकी हैं।

फिक्स्ड इनकम (Fixed Income) में भी दम

सिर्फ शेयर ही नहीं, EM बॉन्ड्स ने भी मज़बूत रिटर्न दिया है। फरवरी 2026 तक EM लोकल करेंसी गवर्नमेंट बॉन्ड्स ने 2.26% का रिटर्न दिया, जबकि पिछले 12 महीनों में 15.06% का रिटर्न मिला। 2025 में EM बॉन्ड्स ने 9.3% का रिटर्न दिया, जो डेवलप्ड मार्केट बॉन्ड्स के 6.3% से बेहतर है। इसका एक बड़ा कारण है लोकल-करेंसी डेट (Local-currency debt) में डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स (Domestic Investors) की बढ़ती हिस्सेदारी, जो करेंसी वोलेटिलिटी (Currency Volatility) से कम प्रभावित होते हैं। मेक्सिको और इंडोनेशिया जैसे देशों में फॉरेन ओनरशिप (Foreign Ownership) घटी है, जिससे EM डेट को बाहरी झटकों से ज़्यादा सुरक्षा मिली है।

छिपे हुए जोखिम: AI का साइड-इफ़ेक्ट और लेवरेज

इन सबके बावजूद, जोखिम बने हुए हैं। AI की तेज़ी जहां ग्रोथ दे रही है, वहीं ऑटोमेशन से भारत जैसी सर्विस-बेस्ड इकोनॉमीज़ को खतरा है। AI के कारण कुछ EM टेक सेगमेंट्स में 'डॉट-कॉम' (Dot-com) एरा जैसी सट्टेबाजी और ओवरवैल्यूएशन का खतरा है। अमेरिकी बाज़ार में बड़े डेफिसिट (Deficit) और अनिश्चितता ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) को बाधित कर सकती है। डॉलर के अचानक मज़बूत होने पर अन-हेज्ड (Unhedged) EM इन्वेस्टर्स को बड़ा नुकसान हो सकता है। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भी एक बड़ा वाइल्डकार्ड है।

आगे का नज़रिया: स्थिरता और समझदारी से निवेश

आगे 2026 में EM की पॉजिटिव चाल जारी रहने की उम्मीद है। बेहतर ग्रोथ डिफरेंशियल (Growth Differentials), डॉलर की नरमी और EM इकोनॉमीज़ में ईज़िंग मॉनेटरी पॉलिसी (Easing Monetary Policy) का फायदा मिलेगा। हालांकि, अब यह रिटर्न मल्टीपल एक्सपेंशन (Multiple Expansion) के बजाय अर्निंग्स सर्टेन्टी (Earnings Certainty) और ड्यूरेबिलिटी (Durability) पर ज़्यादा निर्भर करेगा। निवेशकों को देशों और सेक्टर्स के बीच बढ़ती भिन्नता (Divergence) को ध्यान में रखते हुए समझदारी से निवेश करना होगा। अमेरिकी एसेट्स से दूरी बनाए रखने का ट्रेंड जारी रह सकता है, लेकिन EM की आउटपरफॉरमेंस (Outperformance) इस बात पर निर्भर करेगी कि वे टेक्नोलॉजी को कितनी अच्छी तरह अपनाते हैं और वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना कैसे करते हैं।

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