यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य पीटर काज़िमिर ने साफ संकेत दिया है कि जून में ब्याज दरों में बढ़ोतरी होना 'लगभग तय' है। यह यूरोपियन इकोनॉमी के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण एनर्जी की कीमतें हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास धीमा पड़ रहा है। पॉलिसी मेकर्स के सामने एक मुश्किल चुनौती है: बढ़ती कीमतों से लड़ना, बिना अर्थव्यवस्था को और कमजोर किए।
महंगाई बढ़ी, ग्रोथ घटी
यूरोज़ोन में अप्रैल 2026 तक महंगाई बढ़कर 3.0% पर पहुंच गई, जो ECB के 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर है। एनर्जी की कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे सालाना महंगाई दर 10.9% तक पहुंच गई, जो मार्च में 5.1% थी। वहीं, दूसरी तरफ यूरोज़ोन की इकोनॉमी कमजोर दिखी, जिसमें 2026 की पहली तिमाही में ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में महज़ 0.1% की ग्रोथ दर्ज की गई। बढ़ती कीमतों और धीमी ग्रोथ के इस मेल ने स्टैगफ्लेशन (Stagflation) की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मिडिल ईस्ट में तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावटों के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें लगभग $108-112 प्रति बैरल बनी हुई हैं, जो महंगाई पर दबाव बढ़ा रही हैं।
ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स के अलग-अलग रास्ते
दुनिया भर के बड़े सेंट्रल बैंक अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने अपनी ब्याज दरें अपरिवर्तित रखी हैं और भविष्य में कटौती के संकेत दिए हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) ने भी अपनी दरों को स्थिर रखा, महंगाई पर एनर्जी की कीमतों के असर को स्वीकार किया और सतर्क रुख अपनाया। यह ECB से बिल्कुल अलग है, जहां बाज़ार इस साल कई बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें जून में 80% तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। यह बाज़ार की उम्मीदें अन्य क्षेत्रों की तुलना में यूरोज़ोन में महंगाई के बड़े जोखिम को दर्शाती हैं।
नीति सख्त करने के जोखिम
पहले से ही कमजोर चल रही अर्थव्यवस्था में मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को सख्त करने के ECB के लिए बड़े जोखिम हैं। ऊंची ब्याज दरें निवेश और खर्च को और कम कर सकती हैं, जिससे आर्थिक मंदी और बेरोजगारी बढ़ सकती है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की समस्याओं से उत्पन्न महंगाई को दरें कितनी प्रभावी ढंग से कम कर पाएंगी, क्योंकि ये उपाय मुख्य रूप से मांग को प्रभावित करते हैं। धीमी ग्रोथ के दौर में ECB द्वारा की गई पिछली दर बढ़ोतरी से कभी-कभी बाहरी महंगाई को रोके बिना बाज़ार में हलचल देखी गई है। कोर इन्फ्लेशन, अप्रैल में थोड़ा गिरकर 2.2% पर आ गया है, लेकिन यह अभी भी ECB के लक्ष्य से ऊपर है। घरों की महंगाई की उम्मीदें बढ़ी हैं, जो बताता है कि कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में ECB को आर्थिक कमजोरी के बावजूद अधिक आक्रामक सख्ती करनी पड़ सकती है। विश्लेषकों ने स्टैगफ्लेशनरी दबावों के बढ़ने की चेतावनी दी है, जिसका मतलब है कि ECB के नीतिगत फैसले मुश्किल भरे और संभावित जोखिमों वाले होंगे।
ब्याज दरों का भविष्य
बाज़ार उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 के अंत तक ECB कम से कम दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकती है। कुछ विश्लेषक, जैसे UOB, जून में सिर्फ एक बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। जर्मनी के 10-year बॉन्ड यील्ड (bond yield) लगभग 3.06% तक बढ़ गए हैं, जो निवेशकों की ऊंची उधार लागत की उम्मीदों को दर्शाता है। यूरोज़ोन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि मिडिल ईस्ट संघर्ष कब तक चलता है, एनर्जी की कीमतों पर इसका क्या असर होता है, और ये व्यापक अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करते हैं। ECB का कहना है कि वह आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर फैसले लेगा, जिसमें महंगाई और ग्रोथ के आंकड़े मुख्य होंगे।
